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सपा सरकार में थप्पड़ की गूंज और गोलियों की तड़तड़ाहट से फैली थी दहशत, बहा था तीन बेगुनाहों का खून

Fri, 08 Nov 2019 08:20 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, जालौन
यूपी डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 08 Nov 2019 08:20 PM IST
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life imprisonment of Seven accused including the Colonelganj CO of Kanpur
कोंच कोतवाली कांड में सजा के बाद जाते दोषी - फोटो : अमर उजाला
पंद्रह साल पहले हुए कोंच कोतवाली कांड में छह पुलिस कर्मियों समेत सात लोगों को आजीवन कारावास व 50-50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है। सजा पाने वालों में कानपुर स्थित कर्नलगंज सर्किल के सीओ भगवान सिंह और अन्य में तत्कालीन इंस्पेक्टर कोंच देवदत्त सिंह राठौर का बेटा अनिल राठौर भी शामिल हैं। अदालत के फैसले के बाद सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया है।


किसी को क्या पता था कि 31 जनवरी 2004 की शाम कोंच के जवाहर नगर मोहल्ले में दो पक्षों के बीच हुई मामूली सी मारपीट कोतवाली में तीन तीन लाशें गिरवा देगी और फिर आगजनी, तोड़फोड़ व बलवा सब कुछ, कुछ घंटों में ही हो जाएगा। कोतवाली के भीतर हुए हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शी आज भी उस खूनी कहानी को बताते हुए सहम जाते हैं, जिसने कोंच कोतवाली की फर्श को बेगुनाहों के लहू से लाल कर दिया था।
 
life imprisonment of Seven accused including the Colonelganj CO of Kanpur
अभियुक्तों को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 31 जनवरी को क्षेत्र के जवाहर नगर मोहल्ले में दो पक्षों के बीच किसी मामूली सी बात पर विवाद हुआ था। तब सपा की सरकार थी और इलाके के सुरेंद्र निरंजन सपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य थे पर 31 जनवरी की शाम वह कोंच में नहीं थे। लिहाजा मोहल्ले के लोगों ने मामले को निपटाने के लिए सुरेंद्र के करीबी रिश्तेदार गल्ला व्यापारी शिव कुमार को साथ लिया और कोतवाली पहुंच गए।

 
life imprisonment of Seven accused including the Colonelganj CO of Kanpur
इसी वाहन से ले जाए गए सभी अभियुक्त - फोटो : अमर उजाला
शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन इंस्पेक्टर डीडीएस राठौर से कहा कि मामला तूल देने के लायक नहीं, लिहाजा समझौता कराकर दोनों पक्ष को छोड़ा जा सकता है पर इंस्पेक्टर नहीं मानें। बकौल शिव कुमार समझौता टलने के बाद जब वे जाने लगे तो इंस्पेक्टर राठौर ने अपने सिपाहियों से उन्हें भी लाकअप में डालने को कहा और घर चले गए।

 
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life imprisonment of Seven accused including the Colonelganj CO of Kanpur
अभियुक्त का परिवार मिलने के लिए इंतजार करता हुआ - फोटो : अमर उजाला
अगले दिन यानी 1 फरवरी 2004 को उनके रिश्तेदार सपा नेता सुरेंद्र निरंजन व उनके भाई रोडवेज यूनियन नेता महेंद्र कोतवाली पहुंचे और उन्हें लाकअप में डालने का विरोध करने लगे। इसी बात पर इंस्पेक्टर और सुरेंद्र के बीच कहासुनी शुरू हो गई, तब तक कुछ और लोग भी उनके समर्थन में कोतवाली आ चुके थे। इसी बीच न जाने किसने इंस्पेक्टर राठौर को एक थप्पड़ जड़ दिया, बस फिर क्या था कि कोतवाली गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी। इंस्पेक्टर राठौर ही नहीं कोतवाली के सभी पुलिस कर्मी यहां तक कि इंस्पेक्टर का बेटे अनिल भी पुलिस के हथियार से अंधाधुंध गोलियां चला रहा था।

 
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पीड़ित पक्ष के परिजन को समझाते पुलिस कर्मी - फोटो : अमर उजाला
अंधाधुंध गोलियां चलीं, किसी की हिम्मत नहीं पड़ी
प्रत्यक्षदर्शी मयंक मोहन का कहना है कि कोतवाली में चलने वाली अंधाधुंध गोली किसे और कहां लग रही थी कोई देखने वाला नहीं था। बाहर भी लोगों की भीड़ एकत्र थी लेकिन किसी ने काफी देर तक कोतवाली में घुसने की हिम्मत नहीं की। पुलिस कर्मियों को खून से सनी वर्दी में कोतवाली से बाहर निकलते देख सभी के चेहरे फक पड़ गए थे। करीब सात दिन तक नगर में कर्फ्यू सा माहौल था।

 
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