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कुलदीप बनना चाहते थे तेज गेंदबाज, एक चोट ने चाइनामैन बना दिया

Sat, 23 Sep 2017 06:06 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 23 Sep 2017 06:06 PM IST
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Kuldeep wanted to become fast bowler but injury made Chinaman
डेमो पिक

विकेट की हैट्रिक लेने वाले स्पिनर गेंदबाज कुलदीप यादव को उनकी कलाई में लगी चोट ने चाइनामैन बना दिया। दरअसल, कुलदीप तेज गेंदबाज बनना चाहते थे, लेकिन दस साल की उम्र में घर में ही खेलते समय सीढ़ी से गिर गए थे। इससे उनके बाएं हाथ की कलाई में चोट लग गई थी। इसके बाद से ही उन्होंने स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास करना शुरू कर दिया।


 

 

Kuldeep wanted to become fast bowler but injury made Chinaman
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लालबंगला केडीए कालोनी निवासी कुलदीप के पिता रामसिंह यादव कहते हैं कि इस चोट ने कुलदीप को सफल चाइनामैन बना दिया। अमर उजाला से खास बातचीत में रामसिंह ने बताया कि सीढ़ी से गिरने के बाद कुलदीप के हाथ में प्लास्टर चढ़वाना पड़ा था। जब प्लास्टर खोला गया तो उनकी कलाई में हलका टेढ़ापन था। उन्हें नहीं पता था कि उनके बेटे की यह खामी एक दिन उसे इतना बड़ा स्टार बना देगी। वो कहते हैं कि हाथ में हल्का टेढ़ापन होने की वजह से ही उसकी गेंद ज्यादा टर्न करती है।
कुलदीप के कोच कपिल पांडेय भी उसे स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह देते थे। इसके पीछे उनका तर्क था कि कुलदीप की हाइट (168 सेंटीमीटर) एक तेज गेंदबाज के मुकाबले कम है।
 

 

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क्या है चाइनामैन
लेफ्ट आर्म लेग स्पिन गेंद फेंकने वाले को चाइनामैन गेंदबाज कहा जाता है। वर्तमान में कुलदीप के अलावा विश्व में श्रीलंका के पास ही चाइनामैन गेंदबाज (लक्षन संदाकन) है।

दुबले-पतले कुलदीप को फिटनेस के लिए मैदान लेकर पहुंचे थे पिता
कुलदीप के पिता बताते हैं कि वह बचपन में बहुत दुबला-पतला था। व्यायाम कराने के उद्देश्य से उसे जेके कालोनी स्थित रोवर्स मैदान लेकर जाते थे। तब उसकी उम्र करीब आठ साल थी। करीब छह महीने बाद कोच कपिल पांडेय ने उन्हें बुलाकर कहा कि इस बच्चे में लगन है, यह मेहनती है, इसके बदौलत बहुत आगे जा सकता है। इसके बाद क्रिकेट प्रेमी रामसिंह ने बेटे कुलदीप का एडमिशन क्रिकेट एकेडमी में करा दिया।
 

 

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फख्र है बेटे पर, सपना साकार किया
कुलदीप के पिता ने बताया कि वह खुद भी क्रिकेट के शौकीन हैं। कॉलेज से क्रिकेट खेलते भी रहे हैं। भाई जनार्दन भी अच्छे बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुलदीप पढ़ने में भी तेज था और तेज गेंदबाज बनना चाहता था। उनका भी सपना था कि बेटा देश के लिए क्रिकेट खेले। आज बेटे ने उनका ही नहीं पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है।
 

 

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बाइक से घूमना पसंद, ब्रांडेड कपड़ों के शौकीन हैं कुलदीप
कुलदीप की बहन अमिता और अनुष्का ने बताया कि उसे ब्रांडेड जूते-कपड़े पहनने का शौक है। बाइक से घूमना भी पसंद है। कार से कहीं जाना होता है तो पिता को साथ में ले लेकर जाता है। कार पिता जी ही चलाते हैं। बहनों ने बताया कि कुलदीप का साढ़े तीन साल की उम्र में कानपुर-लखनऊ रोड स्थित एक बोर्डिंग स्कूल में एडमीशन कराया गया था। जब वे मिलने जाते तो बहुत रोता था। इस पर एक साल बाद ही उसे वहां से निकाल लिया गया।
 

 

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