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कानपुर: 15 साल बाद बदले नियम, 10वीं में आएंगे बाहरी परीक्षक, लैब्स में धूल खा रहे उपकरण, DIOS ने कही ये बात

Thu, 15 Oct 2026 09:17 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 15 Oct 2026 09:17 AM IST
सार

Kanpur News: यूपी बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षाओं से पहले अनुदानित स्कूलों की प्रयोगशालाओं की बदहाली का मामला सामने आया है। करीब 15 साल बाद बोर्ड द्वारा नियम बदलकर हाईस्कूल के विज्ञान और गृह विज्ञान प्रैक्टिकल के लिए बाहरी परीक्षकों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है।

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Kanpur Rules changed after 15 years external examiners oversee Class 10 exams equipment gathering dust in labs
महात्मा गांधी गोपीनाथ हायर सेकेंड्री स्कूल की लैब में रखे जार में जमी पड़ी धूल - फोटो : amar ujala

कानपुर में दिसंबर के अंत में यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। इस बार हाईस्कूल में विज्ञान और गृह विज्ञान के प्रैक्टिकल के लिए बाहरी परीक्षक आएंगे। शहर के कई अनुदानित स्कूलों में प्रयोगशालाओं की स्थिति दयनीय है। जिस प्रयोगशाला में बच्चों को विज्ञान के प्रयोग करने चाहिए, वहां उपकरण धूल फांक रहे हैं और मकड़ी के जाले व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। कहीं लैब के नाम पर एक कमरा है तो कहीं केमिकल और उपकरण इतने पुराने हैं कि उनका इस्तेमाल करना भी जोखिम भरा है।


लैब की इन बदहाल व्यवस्था ने स्कूलों की मुश्किल बढ़ा दी है। अनुदानित स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या बजट की है। शिक्षकों के वेतन के अलावा स्कूलों को मूलभूत सुविधाओं और प्रयोगशालाओं के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलता। आठवीं तक शिक्षा निशुल्क होने के कारण छात्रों से फीस नहीं ली जा सकती है। 9वीं से 12वीं तक भी फीस बेहद कम है। इससे बिजली, लैब उपकरण, केमिकल और दूसरी जरूरतों का खर्च निकालना मुश्किल होता है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार प्रैक्टिकल के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे लगाने पड़ते हैं।

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Kanpur Rules changed after 15 years external examiners oversee Class 10 exams equipment gathering dust in labs
स्कूल की लैब के बाहर टूटा पडा फर्श - फोटो : amar ujala

केस- 1
महात्मा गांधी गोपी नाथ हायर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा छह से लेकर 10 तक में 50 बच्चे पंजीकृत हैं। हाईस्कूल में 11 छात्र हैं। 50 बच्चों के पढ़ने के लिए दो कमरे हैं। शिक्षक सात हैं। बिजली, शौचालय की व्यवस्था नहीं है। शिक्षकाें ने अपने पैसे जोड़कर सोलर बैटरी के माध्यम से बिजली की व्यवस्था की है। प्रैक्टिकल लैब के नाम पर एक कमरा है। यह कमरा ही स्टाफ रूम है। आधे हिस्से में प्रैक्टिकल के कुछ उपकरण रखे हैं जिसमें धूल की मोटी परते जमा है। यह स्थिति साफ बयां करती है कि वर्षों से स्कूल में प्रैक्टिकल नहीं हुआ है। ऐसा हो भी कैसे, जब उपकरण खरीदने और प्रयोगशाला दुरुस्त करने के लिए बजट ही नहीं है। परीक्षाओं के समय शिक्षक पैसे एकत्र कर थोड़ा बहुत सामान लाकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।

Kanpur Rules changed after 15 years external examiners oversee Class 10 exams equipment gathering dust in labs
गांधी स्मारक इंटर कॉलेज में धूल खा रहे केमिस्ट्री-फिजिक्स लैब - फोटो : amar ujala

केस- 2
गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, गोविंदनगर में भी प्रैक्टिकल लैब की हालत बेहद जर्जर है। लैब तक पहुंचने का रास्ता भी खतरनाक है। छतों का प्लास्टर कई जगह से टूटा तो कई जगह से जर्जर है। स्कूल के कर्मचारियों ने बताया कि हाल ही में लैब में प्रैक्टिकल हुए हैं लेकिन स्थिति देखकर लगा कि लैब जमाने से खुली ही नहीं है। उपकरण, केमिकल इतने पुराने हैं कि यदि छात्र ने प्रयोग किया भी है तो जरूरी नहीं कि उसका परिणाम सही आया हो।

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Kanpur Rules changed after 15 years external examiners oversee Class 10 exams equipment gathering dust in labs
गांधी स्मारक इंटर कॉलेज में धूल खा रहा लैब का सामान - फोटो : amar ujala

15 साल बाद बदला परीक्षक का नियम
बोर्ड ने करीब 15 साल बाद हाईस्कूल के प्रैक्टिकल की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब विज्ञान और गृह विज्ञान के प्रैक्टिकल के लिए बाहरी परीक्षक आएंगे। अभी तक स्कूल के शिक्षक ही छात्रों का प्रैक्टिकल लेकर अंक देते थे। इंटरमीडिएट की तर्ज पर हाईस्कूल के प्रैक्टिकल की तिथि भी जारी की जाएगी और उसी के अनुसार परीक्षा होगी। अब सवाल यह है कि इन अव्यवस्थाओं के बीच बाहरी परीक्षकों की मौजूदगी में छात्रों के प्रैक्टिकल कैसे कराए जाएंगे।

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Kanpur Rules changed after 15 years external examiners oversee Class 10 exams equipment gathering dust in labs
गोविंद नगर स्थित गांधी स्मारक इंटर कॉलेज - फोटो : amar ujala

अनुदानित कई स्कूलों की प्रयोगशालाओं की स्थिति ठीक नहीं है। कई बार स्कूलों को चेतावनी भी दी गई है। अपनी दिक्कतों को दूर करने के लिए अनुदानित स्कूल के प्रबंधकों को अपनी आय के स्त्रोत बढ़ाने होंगे, ताकि वे स्कूलों की जरूरतों को पूरा कर सकें। प्रबंधक अगर विद्यालय की परेशानियों को दूर करने का प्रयास करेंगे, तो निश्चित ही उनके यहां छात्र संख्या भी बढ़ेगी।  -प्रवीण कुमार, डीआईओएस

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