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Vikas Dubey: आपराधिक अकड़, राजनैतिक पकड़ विकास दुबे के दबदबे का आधार, ब्लाक प्रमुख बनने की थी चाहत, आरक्षण बन रहा था बाधा
Sun, 05 Jul 2020 11:08 AM IST
शिखा पांडेय
राहुल त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
राहुल त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 05 Jul 2020 11:08 AM IST
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घटना के बाद शिवराजपुर ब्लाक में पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
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आपराधिक हनक और राजनैतिक पकड़ से विकास दुबे वर्ष 2000 में ही घिमऊ जिला पंचायत चुनाव जीतकर शासनिक और प्रशासनिक गलियारों से सीधा जुड़ गया था, तब से उसकी शिवराजपुर विकास खंड की बिलहन, घिमऊ, जिला पंचायत के अलावा क्षेत्र पंचायत की लगभभ 56 सीटों और ग्राम पंचायत की 40 से अधिक सीटों पर सीधा दखल था। बीते 20 वर्षों में शिवराजपुर ब्लाक प्रमुख उसकी मर्जी का ही बना या यह कहें की उसी के आशीर्वाद से कुर्सी पाई।
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
यदि सरकार द्वारा उसकी मन पसंद सीट किसी अन्य जाति के लिए आरक्षित भी हो जाए तो विकास दुबे का आशीर्वाद ही प्रत्याशी को जीत का सर्टिफिकेट होता रहा है। वर्ष 2010 में बिकरू ग्राम पंचायत की सीट आरक्षित हो जाने पर निर्वाचित प्रधान रजनीकांत को विकास दुबे ने बुरी तरह पीट-पीटकर गांव से परिवार सहित भगा दिया था तब तत्कालीन डीएम ने ग्राम पंचायत समिति गठित की थी।
विकास दुबे (काले कोट में)
- फोटो : amar ujala
बिकरू ग्राम पंचायत में विकास दुबे की मनमर्जी बीते कई दशकों से चली आ रही है वर्ष 2005 में विकास के छोटे भाई दीपू दुबे की पत्नी अंजलि दुबे ग्राम प्रधान बनी थीं। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2010 में बिकरू ग्राम पंचायत सीट आरक्षित हो जाने पर गांव के ही रजनीकांत कुशवाहा पुत्र धनीराम विकास दुबे के आशीर्वाद से मिलने पर चुनाव तो जीत गए, लेकिन चुनाव जीतने के कुछ महीने बाद ही विकास दुबे से उसका विवाद हो गया। जान का खतरा देख रजनीकांत गांव छोड़कर भाग गया था और पूरे 5 साल गांव नहीं लौटा।
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विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
इसके बाद वर्ष 2015 में बिकरू सामान्य सीट होने पर फिर से उसके भाई की पत्नी अंजलि दुबे ग्राम पंचायत की प्रधान हैं। जानकारी के अनुसार अंजलि लखनऊ में ही रहती हैं और विकास और उसके गुर्गे ही प्रधानी चलाते हैं। विकास दुबे का एक पार्टी की पूर्व मंत्री से सीधा संबंध रहा है वर्ष 2000-05 में विकास के कहने पर ही बिलहन सीट से शरद कटियार चुनाव लड़े और रिकॉर्ड मतों से जीते।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद वर्ष 2005-10 में बिलहन सीट पर विकास दुबे ने अपने चचेरे भाई अनुराग दुबे की पत्नी रीता दुबे को मैदान में उतारा और जीत हासिल की जबकि घिमऊ सीट आरक्षित हो जाने पर निवादा गांव निवासी शिवशंकर को जीत दिलाई। वर्ष 2010-15 घिमऊ और बिलहन दोनों सीटें आरक्षित होने पर और चौबेपुर-बिल्हौर विधायक के दबाब के बाद क्रमश: खुशीलाल पाल, गीता को जीत दिलाई।