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Vikas Dubey Encounter: देहात कोर्ट के सामने ही सजती थी विकास दुबे की कचहरी, मिलने वालों की लगती थी लाइन, मंत्रियों तक के आते थे फोन

Sun, 05 Jul 2020 10:36 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 05 Jul 2020 10:36 AM IST
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Kanpur Police Encounter News: Advocate Shivakant told the big thing related to vikas dubey
विकास दुबे (काले कोट में) - फोटो : amar ujala
भाजपा के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने के भीतर हत्या करने का आरोपी विकास दुबे पांच साल बाद कोर्ट से सबूतों के अभाव में बरी हो गया था। समझा जा सकता है कि उसका रसूख क्या रहा होगा। उन दिनों को याद करते हुए शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवाकांत ने कुछ आंखों देेखे दृश्य साझा किए।
Kanpur Police Encounter News: Advocate Shivakant told the big thing related to vikas dubey
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
शिवाकांत ने बताया कि संतोष शुक्ला हत्याकांड के समय ही ककवन में दो पाल बंधुओं की हत्या हुई थी। इन दोनों मामलों का ट्रायल कानपुर देहात की अदालत में चल रहा था। वे पाल बंधुओं के मामले में कानपुर देहात की कोर्ट जाते तो वहां विकास दुबे का जलवा देखने को मिलता।


 
Kanpur Police Encounter News: Advocate Shivakant told the big thing related to vikas dubey
विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट परिसर के बाहर ही उसकी कचहरी सजा करती थी। उससे मिलने वालों की लाइन ऐसे लगती थी जैसे कोई मंत्री हो। उसके रुतबे के आगे पुलिस वाले भी उससे अपराधी जैसा व्यवहार नहीं करते थे। कोर्ट के बाहर विकास दुबे के गुर्गों की फौज देखकर गवाहों की सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती थी।

 
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Kanpur Police Encounter News: Advocate Shivakant told the big thing related to vikas dubey
विकास दुबे - फोटो : amar ujala
चूंकि उन दिनों वे काफी जूनियर थे, इसलिए कोर्ट कचहरी के माहौल को समझने के लिए हर चीज को बहुत गौर से महसूस करते थे। बाद में संतोष शुक्ला हत्याकांड का भी बारीकी से अध्ययन किया। जांच इतनी लचर थी कि पूरा मामला कोर्ट में कहीं ठहरा ही नहीं। न तो गोलियों का मिलान हुआ न असलहे का। गवाह एक-एक कर पलटते गए। इस मामले का जिला जज की अदालत से फैसला आने के बाद हाईकोर्ट में अपील की जा सकती थी। मगर ऐसा भी नहीं हुआ। समझा जा सकता है कि विकास दुबे के मैनेजमेंट और खौफ का क्या आलम रहा होगा। 

 
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Kanpur Police Encounter News: Advocate Shivakant told the big thing related to vikas dubey
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
मंत्रियों तक के आते थे फोन 
संतोष शुक्ला हत्याकांड के समय प्रदेश में भाजपा की ही सरकार थी। उन दिनों विकास दुबे बसपा नेताओं का करीबी था लेकिन जमीन के अवैध कब्जे के धंधे में महारत होने की वजह से भाजपा के भी कुछ नेताओं का चहेता था। नतीजा यह रहा कि भाजपा नेता की हत्या में सजा से बचाने के लिए मंत्रियों तक की पैरवी की बात सामने आई। वही हुआ भी। विकास बाइज्जत बरी हुआ।
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