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कोटा से लौटे छात्रों का छलका दर्द, बोले हॉस्टल बन गया था जेल, कैदियों जैसा और आधा पेट मिलता था खाना

Mon, 20 Apr 2020 01:41 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 20 Apr 2020 01:41 AM IST
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kanpur Lockdown: Spill pain of students who returned from Kota, said hostel had become a jail
कोटा से कानपुर पहुंचे छात्र छात्राएं - फोटो : amar ujala
कोटा से रविवार को कानपुर पहुंचे छात्रों का दर्द छलका वह बोले इन दिनों हॉस्टल जेल जैसा बन गया था । कोटा (राजस्थान) में इंजीनियरिंग और मेडिकल की कोचिंग करने वाले शहर और आसपास के जिलों के 36 विद्यार्थी शनिवार को दो बसों से झकरकटी बस अड्डे पहुंच गए। यहां मौजूद मेडिकल टीम ने सभी का चेकअप और थर्मल स्क्रीनिंग की। रिकॉर्ड दर्ज कर सभी से होम क्वारंटीन में रहने को कहा गया है।


 
kanpur Lockdown: Spill pain of students who returned from Kota, said hostel had become a jail
कोटा से कानपुर पहुंची छात्राओं का छलका दर्द - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन के कारण कोटा में फंसे छात्रों ने सोशल मीडिया और ट्विटर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर सूबे के आलाधिकारियों पर अपनी परेशानियां बताई थीं। इसके बाद यूपी रोडवेज की बसें उन्हें लेने कोटा गई थीं। शनिवार को एक बस से आठ और दूसरी बस से 28 छात्र झकरकटी पहुंचे।

 
kanpur Lockdown: Spill pain of students who returned from Kota, said hostel had become a jail
छात्राओं ने बताया जेल हो गए थे हॉस्टल - फोटो : amar ujala
छात्र-छात्राओं से जब लॉकडाउन में वहां का माहौल पूछा गया तो वे दहशतजदा हो गए। बताया कि इस समय हॉस्टल जेल की तरह हो गया था और वहां खाना भी कैदियों जैसा दिया जाता था। स्क्रीनिंग के दौरान बस अड्डे पर एडीएम सिटी विवेक श्रीवास्तव, एसीएम सेकेंड व बस अड्डे के एआरएम राजेश सिंह मौजूद थे। एआरएम ने बताया कि हो सकता है कि कुछ और छात्र अन्य बसों से देर रात तक यहां पहुंचे।

 
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छात्रों ने बताया खाना नहीं मिलता था - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन में हॉस्टल जेल की तरह थी। जहां सिर्फ हम लोग कैद ही नहीं थे बल्कि खाना भी कैदियों वाला हो गया था। दाल पतली हो गई थी और रोटियों में कटौती की जा रही थी।
जाह्नवी तिवारी, किदवई नगर

लॉकडाउन में न तो कोचिंग जा पा रही थी और न ही तैयारी हो पा रही थी। कोटा में इस माहौल में रहना एक सजा लग रहा था। डिप्रेशन जैसे हालात सभी छात्र-छात्राओं में थे। अब उन्नाव से भाई बाइक से लेने झकरकटी आ रहा है।
शुचि बाजपेई, उन्नाव

वहां फंसे लोगों को खाने की सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही थी। हॉस्टल में सुविधाएं कम कर दी गई थीं। कभी नाश्ता मिलता तो कभी नहीं मिलता था। स्थानीय न होने से संकट ज्यादा था।
अंजलि राकेश, रामादेवी

 
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छात्रों ने बताया उनके साथ क्या क्या हुआ - फोटो : amar ujala
आईआईटी की कोचिंग करने की सोच रहा था। वहां पता करने गया था लेकिन तब तक लॉकडाउन हो गया और वहां फंस गया। कानपुर के रहने वालों ने वहां मदद की। फिर वहां हॉस्टल लेना पड़ा।
वात्सल्य गुप्ता, बिरहाना रोड

शुक्रवार शाम को कोचिंग की तरफ से मैसेज आया कि जो लोग कानपुर के हैं, वह अपना अपना सामान पैक कर लें। सुबह कोटा बस अड्डे से उन्हें बस मिलेगी। मैं औैरैया का रहने वाला हूं। झकरकटी तो आ गया हूं लेकिन अब यह कोई बताने वाला नहीं कि औरैया कैसे जाऊंगा।
आकर्ष दुबे, औरैया

जो भी विद्यार्थी आए हैं, उन्हें होम क्वारंटाइन करने के निर्देश प्रशासन ने दिए हैं। जब तक छात्रों के परिवार से कोई नहीं आता है, बच्चे बस अड्डे पर ही सुरक्षित रूप से हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है।
राजेश सिंह, एआरएम,

झकरकटी बस अड्डालॉकडाउन में हॉस्टल जेल की तरह थी। जहां सिर्फ हम लोग कैद ही नहीं थे बल्कि खाना भी कैदियों वाला हो गया था। दाल पतली हो गई थी और रोटियों में कटौती की जा रही थी।
जाह्नवी तिवारी, किदवई नगर

 
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