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Kanpur Kidnapping: नौसिखिए अपहरणकर्ताओं ने कदम-कदम पर दी पुलिस को मात, सर्विलांस फेल, मुखबिर तंत्र ध्वस्त
Sat, 25 Jul 2020 12:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Jul 2020 12:40 PM IST
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
संजीत का अपहरण करने वालों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। पैसों के लालच में नौसिखिए अपहरणकर्ताओं ने साजिश रची और वारदात को अंजाम दे डाला। पर, इन नौसिखिए बदमाशों ने पुलिस को कदम-कदम पर मात दी। पुलिस की लापरवाही का फायदा इन्होंने खूब उठाया। हैरानी की बात ये भी है कि लॉकडाउन के दिन यानी 27 जून को बदमाशों ने कार से ले जाकर शव को नदी में फेंका लेकिन पुलिस ने उनको कहीं पर भी न रोका, न टोका। पुलिस की नाकामी ही संजीत की हत्या की वजह बनी।
kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
26 कॉल कीं, फिर भी ट्रेस नहीं कर सकी पुलिस
अपहरणकर्ताओं ने 29 जून को पहली फिरौती कॉल की थी। इसके बाद 13 जुलाई तक 26 बार एक ही नंबर से कॉल कीं, कई-कई मिनट तक बातचीत हुई। पुलिस को इसकी पूरी जानकारी थी। मगर सर्विलांस अपहरणकर्ताओं को ट्रेस ही नहीं कर सका। साफ है कि पुलिस ने या तो ट्रेस करने की जहमत नहीं उठाई या फिर सर्विलांस पर ही उसका नंबर नहीं लगाया। पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी यही रही।
अपहरणकर्ताओं ने 29 जून को पहली फिरौती कॉल की थी। इसके बाद 13 जुलाई तक 26 बार एक ही नंबर से कॉल कीं, कई-कई मिनट तक बातचीत हुई। पुलिस को इसकी पूरी जानकारी थी। मगर सर्विलांस अपहरणकर्ताओं को ट्रेस ही नहीं कर सका। साफ है कि पुलिस ने या तो ट्रेस करने की जहमत नहीं उठाई या फिर सर्विलांस पर ही उसका नंबर नहीं लगाया। पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी यही रही।
kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
बदमाशों की घेराबंदी में नाकाम
योजना के मुताबिक 13 जुलाई की शाम को अपहरणकर्ता परिजनों से फिरौती के पैसे लेने पहुंचे थे। एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय समेत अन्य फोर्स भी परिजनों के साथ मौजूद थी। मगर पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी नहीं की थी। पुलिस वाले हाईवे पर ऊपर खड़े होकर लाचार बने रहे और नीचे बदमाश रुपयों से भरा बैग लेकर चले गए। घेराबंदी न कर पाने में पुलिस नाकाम रही।
योजना के मुताबिक 13 जुलाई की शाम को अपहरणकर्ता परिजनों से फिरौती के पैसे लेने पहुंचे थे। एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय समेत अन्य फोर्स भी परिजनों के साथ मौजूद थी। मगर पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी नहीं की थी। पुलिस वाले हाईवे पर ऊपर खड़े होकर लाचार बने रहे और नीचे बदमाश रुपयों से भरा बैग लेकर चले गए। घेराबंदी न कर पाने में पुलिस नाकाम रही।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
संजीत के दोस्तों तक से नहीं की पूछताछ
अपहरणकर्ता संजीत के बेहद करीबी निकले हैं जो पहले उसके साथ काम कर चुके थे। अपहरण वाले दिन भी उनसे संजीत से कई बार बातचीत हुई थी। इसके बावजूद पुलिस संजीत के इन दोस्तों तक नहीं पहुंच सकी। इनमें से कोई फरार भी नहीं हुआ था। फिर भी पुलिस नेउनसे पूछताछ तक नहीं की।
अपहरणकर्ता संजीत के बेहद करीबी निकले हैं जो पहले उसके साथ काम कर चुके थे। अपहरण वाले दिन भी उनसे संजीत से कई बार बातचीत हुई थी। इसके बावजूद पुलिस संजीत के इन दोस्तों तक नहीं पहुंच सकी। इनमें से कोई फरार भी नहीं हुआ था। फिर भी पुलिस नेउनसे पूछताछ तक नहीं की।
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- फोटो : अमर उजाला
सीसीटीवी भी नहीं जुटा पाई पुलिस
घर से पांच सौ मीटर की दूरी से ही संजीत को आरोपी कार में बैठाकर ले गए थे। पुलिस ने दूसरे दिन गुुमशुदगी तो दर्ज कर ली थी लेकिन तफ्तीश करने की जहमत नही उठाई। यही वजह है कि संजीत के घर से निकलने के बाद के कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं जुटा सकी। अगर फुटेज जुटाती तो कहीं न कहीं संजीत और आरोपियों की कार नजर आती। वारदात में ये भी पुलिस की बड़ी नाकामी रही है।
घर से पांच सौ मीटर की दूरी से ही संजीत को आरोपी कार में बैठाकर ले गए थे। पुलिस ने दूसरे दिन गुुमशुदगी तो दर्ज कर ली थी लेकिन तफ्तीश करने की जहमत नही उठाई। यही वजह है कि संजीत के घर से निकलने के बाद के कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं जुटा सकी। अगर फुटेज जुटाती तो कहीं न कहीं संजीत और आरोपियों की कार नजर आती। वारदात में ये भी पुलिस की बड़ी नाकामी रही है।