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Kanpur Kidnapping: कन्नौज में रहने वाले संजीत के चाचा ने दिए थे फिरौती के तीन लाख, नम आंखों से बताया सच
Sat, 25 Jul 2020 05:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Jul 2020 05:41 PM IST
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
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कानपुर के संजीत अपहरण कांड में कन्नौज में रहने वाले परिवार के बाबा इंद्रजीत ने बताया कि संजीत की फिरौती को रकम जुटाने उसके पिता चमन गांव गए थे। इस पर दोनों छोटे भाइयों ने जैसे-तैसे व्यवस्था कर तीन लाख रुपये दिए थे। मामले में पोते की मौत की खबर सुन कर 75 वर्षीय इंद्रजीत की आंखें भर आईं।
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उन्होंने कहा कि बऊआ जब भी कानपुर से आता था जिद कर अपने साथ खेत ले जाता था। उसे खेत में बहुत अच्छा लगता था। वह खेत में कई लोगों के साथ बैठकर शहर की बातें बताता था। विश्वास नहीं हो रहा वह अब हमारे बीच नहीं है। चचेरी बहन रोली ने बताया कि साल में एक दो बार संजीत भैया गांव आते थे। वह कानपुर से उनके लिए कपड़े, मिठाई, सामान लाते थे। कहा कि भाई के हत्यारों को फांसी मिले, तभी परिवार को इंसाफ मिलेगा। रोली ने कहा कि पुलिस ने तो उनके परिवार को लुटवा दिया, कोई कैसे पुलिस पर भरोसा करें।
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- फोटो : amar ujala
कन्नौज में संजीत के पिता चमन यादव करीब 30 साल पहले पत्नी को लेकर कानपुर के बर्रा-05 में रहने लगे थे। दो भाई शिव सिंह व मानसिंह बर्रा और दो भाई कश्मीर सिंह व सर्वेश सिंह गांव में रहते हैं। चमन कानपुर में पान की दुकान चलाते हैं। उन्होंने इकलौते बेटे संजीत यादव को बेहतर शिक्षा दिलाई, वह लैब टेक्नीशियन था। बारह जून को संजीत के अपहरण की खबर पर कश्मीर और सर्वेश कानपुर चले गए थे।
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- फोटो : amar ujala
30 लाख रुपये फिरौती लेने के बाद भी बदमाशों ने संजीत की हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे चचेरी बहन रोली को फोन पर भाई संजीत की हत्या की खबर मिली। ये सुनते ही तीनों बहनें रोली, मोनी और सानू चीख पड़ीं। शोर सुनकर आसपास के लोग घर पहुंचे। कुछ ही देर में पूरे गांव में खबर फैल गई। इससे गांव में सन्नाटा पसर गया। रोते-रोते तीनों बहनें बेहोश हो रही थीं। पड़ोस के लोगों ने उन्हें संभाला। परिवार के साथ गांव के कई लोग कानपुर रवाना हो गए।
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- फोटो : अमर उजाला
जनवरी में गांव आया था संजीत
कन्नौज। उसके पड़ोसी और बचपन के दोस्त बृजेश ने बताया कि संजीत जनवरी में गांव आया था। सर्दियों में रात 11 बजे तक वह आग के पास दोस्तों के साथ बैठा रहता था। गांव में जब भी कोई बीमार होता था, तो संजीत कानपुर के अच्छे अस्पतालों में इलाज कराता था। संजीत की हत्या पुलिस की लापरवाही से हुई है। पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
कन्नौज। उसके पड़ोसी और बचपन के दोस्त बृजेश ने बताया कि संजीत जनवरी में गांव आया था। सर्दियों में रात 11 बजे तक वह आग के पास दोस्तों के साथ बैठा रहता था। गांव में जब भी कोई बीमार होता था, तो संजीत कानपुर के अच्छे अस्पतालों में इलाज कराता था। संजीत की हत्या पुलिस की लापरवाही से हुई है। पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।