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Kanpur Kidnapping Case: पुलिस का अपना ‘राग’, कई घरों केे बुझ गए ‘चिराग’
Sat, 25 Jul 2020 01:03 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Jul 2020 01:03 PM IST
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
संजीत अपहरण और हत्याकांड में पुलिस एक बार फिर अपहर्ताओं के आगे हार गई। संजीदा मामलों में भी पुलिस की देर से जागने वाली आदत संजीत की मौत की वजह बनी। परिजन लगातार मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस हर बार की तरह अपना अलग ‘राग’ अलापती रही।
Kanpur Kidnapping Case
- फोटो : amar ujala
अपहर्ता बेखौफ होकर परिजनों को फोन पर धमकाते रहे, और पुलिस तमाशबीन बनी रही। यह कोई पहला मामला नहीं जब पुलिस की लापरवाही किसी के जीवन पर भारी पड़ी।पहले भी अपहरण की कई वारदातों में पुलिसिया लापरवाही से कई घरों के ‘चिराग’ बुझ चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस के छोटे-बड़े अधिकारियों ने कोई सीख नहीं ली।
Kanpur Kidnapping Case
- फोटो : amar ujala
पुल से पैसे फिंकवाने का पुराना पैंतरा
पुलिस केएक अधिकारी ने बताया कि अपहरण के मामले में बदमाश अक्सर फिरौती के लिए ऐसी जगह बुलाते हैं, जहां उनके पकड़े जाने के चांस न के बराबर हों। पूर्व की कई वारदातों में यह बात सामने आ चुकी है। संजीत के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ।
पुलिस केएक अधिकारी ने बताया कि अपहरण के मामले में बदमाश अक्सर फिरौती के लिए ऐसी जगह बुलाते हैं, जहां उनके पकड़े जाने के चांस न के बराबर हों। पूर्व की कई वारदातों में यह बात सामने आ चुकी है। संजीत के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
फिरौती की रकम के लिए अपहर्ता संजीत के पिता को उन्नाव, चकेरी, नौबस्ता के चक्कर लगवाते रहे, और फिर गुजैनी पुल पर बुलाकर पैसे नीचे फिंकवा दिए। पिता का आरोप है कि उन्होंने पुलिस के कहने पर ही पैसे नीचे फेंके थे। लेकिन जब तक पुलिस नीचे पहुंची अपहर्ता पैसे लेकर फरार हो गए। अगर समय रहते पुलिस गुजैनी पुल के नीचे जाल बिछा देती तो आरोपी 13 जुलाई को ही पकड़े जाते।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : amar ujala
अपहरण के मामलों में पुलिस करती खानापूरी
अपहरण के अधिकांश मामलों में फिरौती के लिए फोन आने के बाद भी पुलिस शुरुआती तौर पर इसे फर्जी ही मानती है। युवतियों के गायब होने पर पुलिस अक्सर परिजनों से यही कहती है कि ‘किसी के साथ भाग गई होगी’। वहीं, युवकों के मामलों में ‘परेशान न हो, घूम फिरकर आ जाएगा’, कहकर कई दिनों तक पीड़ितों को टरकाती रहती है।
अपहरण के अधिकांश मामलों में फिरौती के लिए फोन आने के बाद भी पुलिस शुरुआती तौर पर इसे फर्जी ही मानती है। युवतियों के गायब होने पर पुलिस अक्सर परिजनों से यही कहती है कि ‘किसी के साथ भाग गई होगी’। वहीं, युवकों के मामलों में ‘परेशान न हो, घूम फिरकर आ जाएगा’, कहकर कई दिनों तक पीड़ितों को टरकाती रहती है।