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Exclusive: क्या तत्कालीन एसएसपी ने दिया था विकास दुबे को संरक्षण, सीओ की अनदेखी में फंसे आईपीएस अनंतदेव
Sun, 12 Jul 2020 01:38 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 12 Jul 2020 01:38 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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कानपुर एनकाउंटर में शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र की चिट्ठियों को नजरंदाज करने के मामले में शहर के तत्कालीन एसएसपी अनंतदेव मुश्किल में पड़ते नजर आ रहे हैं। वर्तमान में वह पीएसी मुरादाबाद में डीआईजी हैं। लखनऊ रेंज की आईजी ने चार मामलों में उनके खिलाफ रिपोर्ट सौंपी है। इसमें विकास दुबे पर दर्ज केस से धाराएं कम करने के अलावा तीन अन्य गंभीर प्रकरण शामिल हैं।
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एक मामले में पूर्व एसओ चौबेपुर विनय तिवारी को बचाया गया जबकि, शहीद सीओ ने विनय पर कार्रवाई के लिए पूर्व एसएसपी को लगातार पत्र भेजे थे। अन्य में आरोपियों के नाम हटाए गए। जांच अधिकारी ने एसआईटी की जांच में इन मामलों को भी शामिल करने की सिफारिश की है। बिकरू गांव की वारदात के बाद शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्र का पत्र वायरल हुआ था।
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ये पत्र उन्होंने जून के दूसरे सप्ताह तक एसएसपी रहे अनंत देव को लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि तत्कालीन एसओ चौबेपुर विनय तिवारी ने विकास दुबे से साठगांठ कर रंगदारी के केस से उसका नाम हटा दिया। विकास बड़ा अपराधी है और वह बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है। उन्होंने थानेदार पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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- फोटो : अमर उजाला
पत्र वायरल होने के बाद उसके गायब होने की बात एसएसपी कानपुर दिनेश कुमार पी ने कही थी। डीजी मुख्यालय के निर्देश पर आईजी रेंज लखनऊ लक्ष्मी सिंह ने जांच करके रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक जांच में सीओ का पत्र सही पाया गया है। इसके अलावा तीन अन्य मामलों में गड़बड़ियां मिली हैं।
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जांच के दायरे में आए ये केस
सूत्रों के मुताबिक, एक दोहरे हत्याकांड के केस में आरोपी का नाम बाहर किया गया। इसके अलावा एक युवती ने मारपीट, छेड़खानी व एससीएसटी का केस दर्ज कराया था। इसमें से भी कुछ आरोपियों के नाम बाहर किए गए थे। इन दोनों मामलों में तत्कालीन एसएसपी अनंतदेव की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एक दोहरे हत्याकांड के केस में आरोपी का नाम बाहर किया गया। इसके अलावा एक युवती ने मारपीट, छेड़खानी व एससीएसटी का केस दर्ज कराया था। इसमें से भी कुछ आरोपियों के नाम बाहर किए गए थे। इन दोनों मामलों में तत्कालीन एसएसपी अनंतदेव की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं।