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विकास दुबे की मोबाइल नंबर की सीडीआर से चौंकाने वाला खुलासा, प्रशासनिक अफसरों को लेकर सामने आया बड़ा सच
Fri, 31 Jul 2020 08:40 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 31 Jul 2020 08:40 AM IST
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विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दहशतगर्द विकास दुबे के कारखास केवल पुलिस और नेता ही बल्कि प्रशासनिक अफसर भी थे। यह खुलासा उसके मोबाइल नंबर की सीडीआर से हुआ है। सीडीआर में राजस्व और आपूर्ति विभाग के कई अफसरों के नंबर मिले हैं। ये सब मिलकर उसके काले कारनामों में साथ देते थे और उस पर पर्दा डाल देते थे।
फाइल फोटो
- फोटो : ani
बिकरू कांड में एक के बाद एक परतें खुल रही हैं। पुलिस के एक अफसर ने बताया कि विकास के मोबाइल नंबर की सीडीआर में शहर के तमाम नेताओं, विधायक, मंत्री के अलावा राजस्व और आपूर्ति विभाग के अफसरों के नंबर मिले हैं। दरअसल, विकास भूमाफिया बन चुका था। वह आए दिन लोगों की जमीन कब्जाता था।
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विकास का कोटे पर भी कब्जा होने से ग्रामीणों को राशन-तेल नहीं मिल पता था। इसकी भी जानकारी स्थानीय स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को रहती थी। पीड़ित उनसे मिलकर अगर शिकायत करते थे तो वे चुप्पी साधे रहते थे। विकास फसल के एवज में किसानों से वसूली भी करता था। कुलमिलाकर नेताओं, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का विकास दुबे के साथ गठजोड़ था। पुलिस भी उस पर कार्रवाई नहीं करती थी।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
क्या इन पर होगी कार्रवाई
बिकरू कांड में चौबेपुर का पूर्व एसओ विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा जेल भेजे गए हैं। पांच अन्य पुलिसकर्मी निलंबित हुए और 68 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर किए गए। मगर प्रशासन के स्थानीय अफसरों की भूमिका की जांच तक नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि क्या इन सभी पर कोई कार्रवाई होगी, जो विकास के काले कारनामों में साथ दे रहे थे।
बिकरू कांड में चौबेपुर का पूर्व एसओ विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा जेल भेजे गए हैं। पांच अन्य पुलिसकर्मी निलंबित हुए और 68 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर किए गए। मगर प्रशासन के स्थानीय अफसरों की भूमिका की जांच तक नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि क्या इन सभी पर कोई कार्रवाई होगी, जो विकास के काले कारनामों में साथ दे रहे थे।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
राज बनकर रह गई सीडीआर
विकास के मोबाइल नंबर की सीडीआर से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अफसरों से लेकर नेताओं से उसकी लंबी बातचीत भी है। विकास के एनकाउंटर के बाद अब उसके मोबाइल नंबर की सीडीआर भी राज बनकर रह गई है। पुलिस या अन्य कोई जांच एजेंसी इसकी जांच नहीं कर रही हैं कि वह किसके-किसके संपर्क में था। कौन-कौन उसका साथ दे रहा था और उनकी भूमिका क्या थी।
विकास के मोबाइल नंबर की सीडीआर से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अफसरों से लेकर नेताओं से उसकी लंबी बातचीत भी है। विकास के एनकाउंटर के बाद अब उसके मोबाइल नंबर की सीडीआर भी राज बनकर रह गई है। पुलिस या अन्य कोई जांच एजेंसी इसकी जांच नहीं कर रही हैं कि वह किसके-किसके संपर्क में था। कौन-कौन उसका साथ दे रहा था और उनकी भूमिका क्या थी।