छिबरामऊ में घिलोई के निकट शुक्रवार रात हादसे में आसपास के ग्रामीणों की मानवता से कई को जिंदगी मिल गई। तत्काल राहत कार्य में जुट जाने से फंसे लोग हौसला कर बाहर निकलने का प्रयास करने लगे। कुछ सवारी आग के गोलों में घिरने के बाद नहीं निकल सकीं। बस के आग में घिर जाने के बाद हुए विस्फोट के बाद ग्रामीण पीछे हट गए। एक घंटे के बाद दमकल पहुंचने पर सैकड़ों लोग दोबारा राहत कार्य में जुटे, जिसके कारण कई लोगों की जान बच गई। दमकल ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
कन्नौज बस हादसा: मसीहा बनकर आए ग्रामीण, बचा ली कई जिंदगियां
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जिला अस्पताल व मेडिकल कालेज को किया गया अलर्ट
भीषण हादसे के बाद जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने घायलों के बेहतर उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कालेज तिर्वा व जिला अस्पताल को अलर्ट किया है। डॉक्टर से लेकर अन्य स्टाफ को ड्यूटी पर मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए। इससे कि घायलों के अस्पताल पहुंचने पर तत्काल इलाज दिया जा सके।
हादसे के आधा घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
दोनों वाहनों में आग लगने की सूचना ग्रामीणों ने अफसरों व दमकल को दी। डीएम रवींद्र कुमार व एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह मौके पर पहुंचे। अफसरों ने यहां पर मौजूद भीड़ को पहले पीछे हटवाया और फिर आग को बुझाने के प्रयास तेज किए। सूचना देने के आधे घंटे बाद दमकल पहुंची लेकिन कुछ ही देर में पानी खत्म हो गया। बस में सवारियां जल रही थीं और पानी खत्म होने से दमकल लौट गई। पड़ोसी जनपद मैनपुरी से फायर ब्रिगेड मंगाई गई।
मां का साथ मांगता रहा मासूम
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्लीपर बस में जब आग की लपटें रौद्र रुप धारण कर रही थीं, उसी समय एक मासूम बच्चा बस की खिड़की की तरफ आ गया। लोगों ने उसे कूदने के लिए प्रेरित किया, लेकिन वह बार-बार बस के अंदर फंसी अपनी मां की तरफ इशारा कर रहा था। कुछ ही देर में इस मासूम को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया।
बस से कूदने पर कई हुए घायल
ट्रक से भिड़ंत के बाद जब स्लीपर बस में आग लगी तो अपनी जान को बचाने के प्रयास में कई सवारियां बस की खिड़कियों से नीचे कूद गईं, जिससे उनको चोटें आई। घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग एक दर्जन एबुलेंसों की व्यवस्था की गई थी।