बेटी ज्योति के हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद बूढ़े पिता शंकर नागदेव के कलेजे में जो ठंडक पहुंची उसने उनके आठ साल के संघर्ष के दौरान हुई शारीरिक और मानसिक थकान को पूरी तरह मिटा दिया। कोर्ट से बाहर निकलते वक्त उनके चेहरे पर चमक तो थी लेकिन आंखों में आंसू भी थे।
मीडिया के सवालों का जवाब देने के लिए रुके तो लगा जैसे एक पल के लिए ज्योति के जन्म से लेकर मृत्यु तक का सारा वाक्या उनके जहन में कौंध उठा है। जबलपुर में 1 सितंबर 1988 को पूजा उर्फ ज्योति के जन्म से घर की फुलवारी खुशियों से महक उठी थी। पूजा की किलकारियां घर में गूंजती थीं, छोटे-छोटे हाथों से मां-बाप की उंगली पकड़कर नन्हें कदम बढ़ाना शंकर नागदेव को आज भी जैसे कल की बात लगती है। पूजा की सभी यादें आज भी उनके दिल में हैं। बड़ी हुई तो स्कूल जाना शुरू किया।
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ज्योति हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
पढ़ाई में ऐसी कि गोल्ड मेडलिस्ट बनकर परिवार ही नहीं पूरे शहर का नाम रोशन किया। 28 नवंबर 2012 का दिन नागदेव परिवार के लिए खुशियों का एक अनूठा तोहफा लाया था। इस दिन नाजों से पली परिवार की लाडली बेटी विवाह मंडप में बैठी और पीयूष के साथ नए जीवन के तमाम सपने संजोए जबलपुर में पिता का घर छोड़ पिया के घर कानपुर आ गई थी।
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ज्योति हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
शादी जन्मों का संबंध होता है। शादी के बाद पूजा को ससुराल आकर नया नाम ज्योति तो मिला लेकिन ससुराल में मायके सा प्यार नहीं मिला। पति जिसने सात फेरे लेकर सात वचन निभाने की बात कही थी वह सात दिन भी ज्योति को खुशी नहीं दे सका। ज्योति पति के प्यार को तरसती रही और पति प्रेमिका के चक्कर में पड़कर पत्नी की ही जान का दुश्मन बन गया।
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ज्योति हत्याकांड
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मां-बाप को दुख न हो इसलिए ज्योति मन में ही सबकुछ दबाए रही। दर्द सहती रही। बातों-बातों में कुछ बताने की कोशिश भी की तो घरवाले समझ नहीं पाए और आखिर 27 जुलाई 2014 की वो मनहूस रात आई जिसने शंकर के परिवार पर ऐसा वज्रपात किया जिसका दंश कभी नहीं मिट सकता।
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ज्योति हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
नाजों से पली जिस बेटी को डोली में विदा किया था ससुराल से उसी की अर्थी निकल रही थी। बेटी के बाप ने उसी दिन कसम खाई कि बेटी के हत्यारों को अंजाम तक पहुंचाएंगे। आठ साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिर 21 अक्तूबर 2022 को वह दिन आया जब ज्योति के हत्यारों को उम्रभर जेल की सीखचों के पीछे रहने की सजा कोर्ट ने सुनाई।