{"_id":"5aa7e2354f1c1ba7758b542a","slug":"islam-is-an-abrahamic-monotheistic-religion-teaching","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जब उलेमा और सूफी संताें ने कहा दहशतगर्दी का इस्लाम से कोई रिश्ता नहीं, जानिए क्या थी वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब उलेमा और सूफी संताें ने कहा दहशतगर्दी का इस्लाम से कोई रिश्ता नहीं, जानिए क्या थी वजह
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 13 Mar 2018 08:08 PM IST
विज्ञापन
उलेमा अाैर सूफी संत कन्नाैज में
इस्लाम हमेशा पूरी दुनिया को सलामती का पैगाम देता रहा है। इसका दहशतगर्दी से कोई रिश्ता नहीं है। जो लोग दहशतगर्दी से रिश्ता रखते हैं, वे इस्लाम के ताल्लुख नहीं रखते हैं। यह देश सूफी-संतों का देश है। यह दहशतगर्दो के लिए कोई जगह नहीं है।
अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस के दौरान बोले देश-विदेश के उलेमा व सूफी
यह कहना है शहर के सरहिंद पब्लिक स्कूल के मदीना ग्राउंड पर विभिन्न स्थानों से आए उलेमाओं और सूफियों का। यहां सभी ने एक स्वर से देश की तरक्की और अमन चैन बरकरार रखने की गुजारिश की। मदीना ग्राउंड पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के उलेमा और सूफी संत पहुंचे हैं। शुरुआत कुरआन पाक की तिलावत से हुई। हजरत उस्माने गनी ने पूरी दुनिया को अमन व शांति का पैगाम दिया।
डेमाे पिक
मौलाना अबूल कैस व साउथ अफ्रीका से आए शब्बीर बरकाती ने नातिया शायरी पेश की। इसके बाद एटा से आए मौलाना जैनुल आबदीन बरकाती ने खिताब किया। बांग्लादेश से आए मेहमान डा. इरशाद बुखारी ने कहा कि शिक्षित इंसान जीवन के किसी भी मैदान में नाकाम नहीं हो सकता। शिक्षा से ही इंसान तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ता है। अच्छी शिक्षा ही बुरी आदतों, गरीबी, असमानता, लैगिंक भेदभाव और समाजिक बुराइयों को दूर करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डेमाे पिक
यूक्रेन से आए शेख अहमद तमीम ने कहा कि भारत सूफी-संतों का देश है। आज लोग इस्लाम को दहशतगर्दी से जोड़ देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। इस्लाम सलामती का पैगाम हमेशा से पूरी दुनिया को देता चला आ रहा है। इस्लाम में दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है। जो दहशतगर्द हैं, उनका इस्लाम धर्म से कोई रिश्ता नहीं है। क्योंकि इस्लाम मानवता, सच्चाई, देशप्रेम व समाजसेवा का संदेश देता है।
विज्ञापन
डेमाे पिक
रूस से आए रशियन इस्लामिक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शेख मोहम्मद रुस्तम, बांग्लादेश से आए पूर्व जज शेख समीम अफजल, रफीक अहमद ने कार्यक्रम की सदारत की। इस दौरान मौलाना अहमद रजा के साथ ही गुजरात, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, से आए उल्माओं ने कार्यक्रम में शिरकत की। सुबह लगभग 40 छात्रों को हाफिज, कारी और फाजिल की डिग्री देकर सम्मानित किया गया।