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आज के युवाओं से नाराज हैं बॉलीवुड गीतकार-अभिनेता पीयूष मिश्र

Sun, 18 Mar 2018 03:04 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 18 Mar 2018 03:04 PM IST
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Indian film actor piyush mishra talk with iit students
पीयूष मिश्रा

बॉलीवुड के मशहूर गीतकार, फिल्मकार और अभिनेता पीयूष मिश्र आज के युवाओं से नाराज हैं। दरअसल उनकी नाराजगी उन लोगों से भी है जो युवाओं को संस्कृति, समाज और देश की बातें नहीं सिखाते। 

Indian film actor piyush mishra talk with iit students
पीयूष मिश्रा
आईआईटी कानपुर टेककृति-18 में में पीयूष मिश्रा ने अपने 'दिल की बात' स्टूडेंट्स से शेयर की तो उनमें एक अलग सा जोश नजर आया। पीयूष ने अपने गाने ‘आरंभ है प्रचंड बोल मस्तकों के झुंड, आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो... आन बान शान या कि जान का हो दान, आज एक धनुष के बाण पे उतार दो... से किया तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।  'इक बगल में चांद होगा, इक बगल में रोटियां, रात के मुसाफिर तू भागना संभल के, पोटली में तेरी हो आग ना संभल के...', 'ओ रे बाबा हम चांदी नहीं मांगते...' आदि गीत भी सुनाए। 
 
Indian film actor piyush mishra talk with iit students
पीयूष मिश्रा
उन्होंने कई सामाजिक मुद्दों पर छात्रों से संवाद किया। दिल्ली में हुए निर्भया कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस रात उस युवती के साथ दो बार दुराचार हुआ। एक बार पांच दरिंदों ने किया और दूसरी बार समाज के उन लोगों ने किया जो सड़क किनारे उसे देखने के बावजूद उसके बदन पर कपड़ा नहीं डाल सके। इसके बाद उन्होंने मार्मिक अंदाज में सुनाया ‘सुनसान गली के नुक्कड़ पर जो कोई कुत्ता चीख-चीखकर रोता है... जब लैंप पोस्ट की गंदली पीली घुप्प रोशनी में कुछ कुछ सा होता है... तब शहर हमारा सोता है, तब शहर हमारा सोता है...’। इसको युवाओं ने खूब पसंद किया। उन्होंने देर रात तक कई गाने गाए। 
 
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Indian film actor piyush mishra talk with iit students
पीयूष मिश्रा
आपकी जिंदगी पागल हाथी सी हो गई है 
पीयूष मिश्रा ने आईआईटीयंस से संवाद किया। उन्होंने कहा कि मैंने 70, 80, 90 का दशक भी देखा है। उस दौर में युवा रेडियो पर ज्यादा एंज्वाय करते थे। रेडियो पर ही गाने सुनते थे और उन गानों को लेकर अपने मन मस्तिष्क में कई तरह की इमेजिनेशन किया करते थे। इससे उनकी दिमागी कसरत हुआ करती थी। लेकिन अबके युवाओं की जिंदगी पागल हाथी जैसी हो गई है। उन्हें पता ही नहीं रहता कि वह क्या कर रहे हैं।

 
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Indian film actor piyush mishra talk with iit students
पीयूष मिश्रा
आज के युवा अपनी संस्कृति, समाज और देश से जुड़े अच्छे लोगों को भी सही से नहीं जानते। अगर आपसे पूछ लिया जाए कि मुंशी प्रेमचंद का गांव कौन सा है तो आप नहीं बता पाओगे। इसमें गलती आपकी नहीं है बल्कि उन लोगों की है जिन्हें यह सब चीजें आपको बतानी चाहिए।
 
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