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5G की स्पीड 4G के मुकाबले 10 गुना होगी ज्यादा, IITK ने बनाया अल्ट्रा वाइडबैंड एंटिना

Tue, 03 Apr 2018 12:44 PM IST
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 03 Apr 2018 12:44 PM IST
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IIT Kanpur planning for 5g
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4G से दस गुना ज्यादा स्पीड 5G देगा। इसके लिए आईआईटी कानपुर सहित देश के 8 संस्थान मिलकर काम करेंगे। रिसर्च के लिए टीम को मिले 224 करोड़ रुपये दे दिए गए हैं। भारत सरकार ने दुनिया में 5 जी पर सबसे बड़े टेस्ट के लिए 224 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। यह प्रोजेक्ट तीन साल के लिए होगा जिसमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन वायरलेस टेक्नोलॉजी (सीईडब्लूआईटी), आईआईएससी बंगलुरु और सोसायटी फॉर अप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर) मिलकर काम करेंगे। सोमवार को इस बाबत दूर संचार मंत्रालय ने पत्र जारी कर दिया। आईआईटी बांबे के प्रोफेसर और हाल ही में आईआईटी कानपुर के नए निदेशक बनाए गए प्रो. अभय करंदीकर बताते हैं कि यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। जहां देश की सभी बड़ी आईआईटी और 200 से ज्यादा विशेषज्ञों की टीम एक साथ मिलकर काम करेंगी। प्रो. करंदीकर ने बताया कि आईटी कानपुर के विशेषज्ञ सॉफ्टवेयर डेफाइंड नेटवर्क, नेटवर्क फंक्शन और कोर नेटवर्क जैसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।  

 

आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने बनाया अल्ट्रा वाइडबैंड एंटिना

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5 जी तकनीक को सफल बनाने के लिए हाईस्पीड डेटा ट्रांसफर की जरूरत होगी। इसके लिए एंटिना डिजाइन की जरूरत थी जिसे आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर वैभव श्रीवास्तव की टीम ने इसे तैयार किया है। प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी टीम की सदस्य यशिका शर्मा ने अल्ट्रा वाइडबैंड एंटिना तैयार किया है। इस एंटिना में तेज डाटा ट्रांसफर के लिए मल्टीपल आउटपुट (एमआईएमओ) तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसी टीम के एक और सदस्य देबदीप सरकार ने एक कॉम्पैक्ट एंटिना डिजाइन किया है जो 5 जी मोबाइल हैंडसेट के लिए काफी कारगार साबित होगा।
 

4 जी से दस गुना ज्यादा स्पीड

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प्रो. करंदीकर ने बताया कि 5 जी पर चल रहा रिसर्च सफल हुआ तो टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। मौजूदा 4 जी स्पीड से अगर 5 जी की तुलना की जाएगी तो इसकी स्पीड दस गुना ज्यादा होगी। पलक झपकते ही बड़ी सी बड़ी फाइलें डाउनलोड और अपलोड हो जाएंगी।
 
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हाई फ्रिक्वेंसी खाली करें कंपनियां

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डिपार्टमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी (डॉट) ने 27 मार्च को एक नोटिस जारी करके मोबाइल कंपनियों से कहा है कि वे छह महीने के अंदर 5 जी के लिए हाई फ्रिक्वेंसी खाली कर दें। खाली करने वाली फ्रिक्वेंसी बैंड 3300-3400 मेगाहर्ट्ज है जिसे 5 जी के लिए प्रयोग किया जाना है। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को छह माह का समय दिया गया है। 
 
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आईआईटी कानपुर इस पर कर रहा काम

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आईआईटी कानपुर के अलग-अलग विभागों से करीब 20 विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। यहां 5 जी टेस्ट बेड तैयार किया जा रहा है। यहां मिलीमिटर वेव, मैसिव मिमो, और डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है। आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. रोहित बुद्घिराज के मुताबिक यहां सेलुलर सिस्टम में वर्चुअल फुल डुप्लेक्स रिलेइंग का भी काम चल रहा है।   
 
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