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PHOTOS: त्योहार से 5 दिन पहले बेघर हुआ ये मुस्लिम परिवार, इस हाल में मनी बकरीद

Mon, 04 Sep 2017 09:25 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 04 Sep 2017 09:25 AM IST
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homeless family of Liaquat Ali
लियाकत अली का बेघर परिवार
कहते हैं गरीबी कमजोर होती है ये बात आज कानपुर के उस्मानपुर इलाके में रहने वाले लियाकत अली को समझ आ गई। सौ बरस से लियाकत का खानदान जिस घर में गुजर बसर कर रहा था उस घर को बकरीद त्योहार के पांच दिन पहले तोड़ दिया गया। बिना किसी नोटिस के नगर निगम ने लियाकत का घर ढहा दिया। जिससे आज लियाकत अपने बच्चों के साथ बिना छत के रहने को मजबूर हैं। 
homeless family of Liaquat Ali
लियाकत अली का बेघर परिवार
लियाकत ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि कोर्ट में केस चल रहा था स्टे भी मिल गया। लेकिन नगर निगम और केडीए अधिकारियों ने पता नहीं किस कारण उनका घर गिरा दिया। यही घर उनके रहने और कमाई का साधन भी था। लियाकत बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर परिवार का गुजर बसर करते हैं। पांच दिन पहले घर बिना नोटिस के ढहा दिया गया। 
homeless family of Liaquat Ali
लियाकत अली का बेघर परिवार
लियाकत का परिवार बड़ी ही बेसब्री से बकरीद का इंतजार कर रहा था। लेकिन महकमा उन्हें ये तोहफा दे देगा इसका उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा न था। जिससे कि वह आज त्योहार मनाने की इस उधेड़बुन में लगे हैं कि परिवार का सिर कैसे छुपाया जाए। माली स्थिति ठीक न होने की वजह से आज वह सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं।  
 
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homeless family of Liaquat Ali
लियाकत अली का बेघर परिवार
बड़े सराफत अली ने कहा था कि इस बार बकरीद में शदाकत, हाफिज अली और बहन खुशनुमा के लिए नये कपड़े खरीद के लाएंगे और घर सजाएंगे। लेकिन बच्चों ने आज नए कपड़े खरीदने से मना कर दिया और कहा कि इन पैसों से नई छत बनवा लें। बेटी खुशनुमा का कहना था कि पूरा त्योहार की खराब हो गया सब ऐसे ही पड़ा है घर टूटने के बाद सबकुछ खत्म सा हो गया जैसा लग रहा है।  
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homeless family of Liaquat Ali
अपनी बेटी खुशनुमा के साथ लियाकत अली
लियाकत का जीवन भी दुख भरी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। डब्लू ब्लाक मकान नंबर 1807 उस्मानपुर, कानपुर में रहने वाले 70 वर्षीय लियाकत अली ने उस जमाने में इंग्लिश से परास्नातक (एमए) कर लिया था जब लोग हाईस्कूल में गुड सेकेंड लाने पर मोहल्ले में मिठाईयां बाट दिया करते थे। पोस्टग्रेजुएशन के बाद लियाकत ने करीब 6 महीने तक अपनी सेवाएं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को दीं जिसके बाद मन न लगने के कारण उन्होंने समाज सेवा करते हुए बच्चों को इंग्लिश की ट्यूशन पढ़ाने लगे। 
 
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