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ई-वॉलेट एप का सहारा लेकर हर रोज 10 लाख की ऑनलाइन ठगी, ऐसे फंसा 'ठगों का मास्टरमाइंड'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:18 PM IST
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पकड़े गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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थंब इंप्रेशन की क्लोनिंग कर खातों से रुपये उड़ाने वाले ऐसे शातिरों को कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है जो रोजाना करीब 10 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी करते थे। पुलिस के मुताबिक शातिरों ने स्वीकार किया है कि वे करीब 80 प्रतिशत खातों से ठगी करने में सफल हो जाते थे। वे पिछले पांच सालों से इस काम में लगे हैं।
एसएसपी के मुताबिक ग्वालटोली में एक महीने पहले इस तरह के मामले की शिकायत मिली थी। इसके बाद पीड़ित से संपर्क किया गया। उसके खाते से जिस खाते में रुपये ट्रांसफर हुए, उससे संपर्क किया गया तो मंसार खान और नफीस का नाम सामने आया। इस आधार पर ही दोनों को क्राइम ब्रांच और स्वरूप नगर पुलिस ने पकड़ा।
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एसएसपी के मुताबिक ग्वालटोली में एक महीने पहले इस तरह के मामले की शिकायत मिली थी। इसके बाद पीड़ित से संपर्क किया गया। उसके खाते से जिस खाते में रुपये ट्रांसफर हुए, उससे संपर्क किया गया तो मंसार खान और नफीस का नाम सामने आया। इस आधार पर ही दोनों को क्राइम ब्रांच और स्वरूप नगर पुलिस ने पकड़ा।
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ऐसे करते थे ठगी
पकड़े गए आरोपी
शातिर सिम बेचने वालों से लोगों का डाटा (मय थंब इंप्रेशन) लेते थे। इसके बाद थंब इंप्रेशन की क्लोनिंग कर रबड़ स्टैंप बनाते थे। इसे अपने अंगूठे में चिपकाकर फर्जी सिम एक्टिव कराते थे। इस फर्जी नंबर के माध्यम से ही अपने मोबाइल में ई-वॉलेट एप स्टोर करते थे। इस एप में बैंक से संबंधित जानकारी दूसरों के खातों की डालते थे, जिसे ये लोग आधार नंबर और एक साफ्टवेयर की मदद से हासिल कर लेते थे। इसके बाद ई-वॉलेट से संबंधित व्यक्ति के खाते की रकम अपने या संबंधित खाते में ट्रांसफर कर लेते थे।
जल्दी कमाई में फंसा मास्टरमाइंड
डेमाे पिक
पांच साल से लगातार लोगों के खाते से रुपये पार करना मंसार बेखौफ हो चुका था। उसे तो पकड़े जाने का भी डर नहीं रह गया था। वह जल्द ही मोटी रकम कमाना चाहता था। बस यही जल्दबाजी में वह दांव खा गया। पुलिस सूत्रों की माने तो एक ही दिन में एक शख्स के खाते से शहर और फिर बिहार में ट्रांसजेक्शन की बात सामने आने के बाद पुलिस ने पड़ताल तेज की तो दोनों शातिर पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
एक्सपर्ट की राय
डेमाे पिक
खाताधारक का बैंक एकाउंट अब आधार से लिंक रहता है। जरा सी चूक से खातधारक की सारी डिटेल आसानी से हासिल की जा सकती है। आधार कार्ड थंब इंप्रेशन और रेटिना से बनाया जाता है। इसलिए खाताधारक का थंब इंप्रेशन हाथ लगते ही शातिर खेल कर देते हैं। कुछ शातिरों की पहुंच साफ्टवेयर तक हो जाती है।
- राजेंद्र अवस्थी, सहायक मंत्री नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक यूनियन
10 हजार रुपये के ट्रांसजेक्शन केलिए ओटीपी नंबर अनिवार्य नहीं है, लेकिन ऐसे ट्रांसजेक्शन सिर्फ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही संभव है। शातिर ठगी करने से पहले खाताधारक का मोबाइल बदलवाने के बाद ही रुपये पार करते होंगे।
- हिमांशु गुप्ता, साइबर एक्सपर्ट
- राजेंद्र अवस्थी, सहायक मंत्री नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक यूनियन
10 हजार रुपये के ट्रांसजेक्शन केलिए ओटीपी नंबर अनिवार्य नहीं है, लेकिन ऐसे ट्रांसजेक्शन सिर्फ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही संभव है। शातिर ठगी करने से पहले खाताधारक का मोबाइल बदलवाने के बाद ही रुपये पार करते होंगे।
- हिमांशु गुप्ता, साइबर एक्सपर्ट
सरकारी योजनाओं को भी लग सकती है चपत
डेमाे पिक
सरकार भ्रष्टाचार और कालाबाजारी रोकने के लिए नए-नए तरीकेअपना रही है, लेकिन शातिर भेद दे रहे हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली हो या अन्य सरकारी योजनाएंा, स्कूल और दफ्तरों में हाजिरी सब में बॉयोमैट्रिक तरीका अपनाया जा रहा है। बॉयोमैट्रिक मशीन में थंब का इंप्रेशन देना होता है। थंब इंप्रेशन की काट सामने आने के बाद से शातिर सरकारी योजनाएं या स्किल डवलपमेंट योजना हो या कोई और सरकारी या निजी संस्थानों का बॉयोमेर्टिक सिस्टम सब को शातिर चूना लगा सकते हैं। मास्टर माइंड ने पुलिस को बताया कि रेल हो या हवाई जहाज की यात्रा सभी में आधार कार्ड और थंब इंप्रेशन से काम होता है। थंब इंप्रेशन का क्लोन होने पर कोई भी दस्तावेजों में हेरफेर कर किसी भी साजिश को अंजाम दे सकता है।