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भारत में भी पूर्णरूप से दिखाई देगा 'साल का पहला चंद्रग्रहण', नकारात्मक ऊर्जा से खुद को बचाएं
राहुल दुबे, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 30 Jan 2018 02:12 PM IST
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31 जनवरी को पड़ने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण विश्व के अन्य हिस्सों के साथ भारत में भी पूर्णरूप से दिखाई देगा। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया चंद्रग्रहण की अवधि 3 घंटे 7 मिनट की होगी। पूर्णिमा तिथि होने के कारण भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना के लिए सुबह 8:28 बजे तक का समय सही माना जा रहा है। इस दिन पूरे 12 घंटों तक भगवान के दर्शन करना अशुभ माना जाएगा।
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आचार्यों के अनुसार ग्रहण के समय मूर्ति छूना, भोजन व नदी में स्नान करना वर्जित है। सूतक काल के समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। भोजन ग्रहण करने और पकाने से दूर रहना अच्छा माना जाता है। देवी देवताओं और तुलसी आदि को स्पर्श नहीं करना चाहिए। पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि सूतक के दौरान गर्भवती स्त्री का घर से बाहर निकलना और ग्रहण देखना वर्जित माना जाता है। ये शिशु की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि इससे उसके अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
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इसके अलावा नाखून काटना, बाल कटवाना, निद्रा आदि जैसी गतिविधियों से भी ग्रहण व सूतक काल के समय परहेज करना चाहिए। इस काल में स्त्री प्रसंग से बचना चाहिए अन्यथा आंखों से संबंधित बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात पूरे घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और सूतक काल प्रारंभ होने से पूर्व दूध, जल, दही, अचार आदि खानपान की सभी चीजों में कुश या तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए।
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वैज्ञानिक मान्यता
ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इस समय को अशुभ माना जाता है। इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं जो एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करती हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस समय चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं। भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं।
ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इस समय को अशुभ माना जाता है। इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं जो एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करती हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस समय चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं। भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं।
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चंद्रग्रहण का समय - शाम 5:35 से 8:41 मिनट 10 सेकेंड तक।
चंद्रग्रहण की अवधि - 3 घंटे 7 मिनट व 10 सेकंड
सूतक काल प्रारंभ सुबह - 8:35:21
सूतक काल की समाप्ति रात- 8:41:10
चंद्रग्रहण की अवधि - 3 घंटे 7 मिनट व 10 सेकंड
सूतक काल प्रारंभ सुबह - 8:35:21
सूतक काल की समाप्ति रात- 8:41:10