फतेहपुर के तिहरा हत्याकांड को अंजाम देने का मास्टरमाइंड मुन्नू सिंह पर पुलिस दशकों से मेहरबान चली आ रही है। दो हत्याओं सहित नौ गंभीर मुकदमे होने तक मुन्नू की हिस्ट्रीशीट तक नहीं खोली गई। मास्टर माइंड एक पूर्व मंत्री की सरपरस्ती में रहता था।
हथगाम थाने के अखरी गांव के पूर्व प्रधान सुरेश उर्फ मुन्नू सिंह का नाम पहली बार 1988 में रामराज की हत्या में आया था। कुछ माह बाद ही वह जेल से छूटकर आ गया। इसके बाद गुंडा एक्ट, आबकारी, आर्म्स एक्ट, गुंडा एक्ट, 2009 में हत्या व हत्या के प्रयास, बलवा के मामले दर्ज हुए।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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नहीं बनाया थाने का हिस्ट्रीशीटर
इसके बाद गैंगस्टर, मिनी गुंडा की 2012 तक कार्रवाई हुई। कुल नौ दर्ज मामलों में सात में चार्जशीट लगा चुकी है। गैंगस्टर एक्ट के तहत अवैध संपत्ति अर्जित करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई। बड़ी बात यह रही कि पुलिस चार से पांच मुकदमों के आरोपियों को हिस्ट्रीशीट खोलकर हिस्ट्रीशीटर बनाती है। ताकि उनकी लगातार निगरानी की जा सके, लेकिन पुलिस मुन्नू सिंह पर आम नागरिक की तरह ही पेश आती रही। उसे थाने का हिस्ट्रीशीटर नहीं बनाया। उसकी निगरानी के कोई इंतजाम नहीं थे।
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मौके पर मौजूद डीएम और एसपी
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ग्रामीणों का कहना रहा कि मुन्नू कुख्यात अपराधी है। उसके खिलाफ किसी ने सालों तक बोलने की हिम्मत नहीं जुटाई। एक पूर्व मंत्री के संरक्षण में मुन्नू के इशारे पर इलाके में पुलिस काम करती थी। मुन्नू के कहने पर कई लोगों पर पुलिस ने फर्जी मामले तक दर्ज किए। इसी वजह से मुन्नू का दबदबा बढ़ता गया। एएसपी विजय शंकर मिश्रा ने बताया कि आरोपी जेल भेजे गए हैं। उनके खिलाफ और भी कार्रवाई होंगी। हिस्ट्रीशीट भी खोली जाएगी।
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गांव में तैनात पुलिस
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साल भर पहले मारपीट को शांतिभंग में निपटाया था
एक साल पहले रक्षाबंधन त्योहार पर पप्पू सिंह को मुन्नू सिंह पक्ष ने घेरकर पीटा था। पुलिस ने दोनों पक्षों से मारपीट की रिपोर्ट दर्ज की। बाद में शांतिभंग की कार्रवाई कर मामला निपटा दिया था।
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मौके पर तैनात पुलिस
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झगड़े के लिए पुत्रों को उकसाता था मुन्नू
मुन्नू पांच साल पहले प्रधानी गवां चुका था। इसके बाद उसे गांव के लोग भी नापसंद और तवज्जो नहीं देने लगे थे। वह सम्मान खो बैठने से आहत रहता था। वह पुत्रों को दोबारा प्रधानी व वर्चस्व कायम करने के लिए झगड़ा फसाद के लिए उकसाता था।