फतेहपुर के मलवां कस्बे में सोमवार शाम हुए भीषण धमाके से आसपास के करीब 11 मकान भी प्रभावित हुए। कई घरों में दरारें आ गईं, जबकि कहीं बीम फटने के साथ प्लास्टर उखड़ गया। धमाके के बाद घटनास्थल के आसपास करीब आधे घंटे तक धुंध छाई रही, जिससे राहत-बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका। धुंध छंटने के बाद लोग मौके पर पहुंच सके।
घटनास्थल के पश्चिम में ननकू सिंह और चुन्नी सिंह के मकान क्षतिग्रस्त हुए। उत्तर दिशा में रुप किशोर सिंह उर्फ रूपा, दक्षिण में शिवमोल सिंह और अनमोल सिंह तथा पूरब में रामू गुप्ता के मकान को नुकसान पहुंचा। पश्चिम दिशा में रामकृष्ण दुबे और शीलू दुबे के मकान भी प्रभावित हुए। रामू गुप्ता की बाइक और कार भी मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं। धमाके के बाद करीब आधे घंटे तक अफरातफरी का माहौल रहा।
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घर से गैस एजेंसी तक लापरवाही बन रही हादसों की वजह
फतेहपुर में रसोई गैस एलपीजी सिलिंडर के इस्तेमाल में थोड़ी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन रही है। कई मामलों में घरों के साथ गैस एजेंसियों की लापरवाही भी सामने आती है। सिलिंडर की पिन लीकेज होने पर कई बार इस्तेमाल के दौरान गैस का हल्का रिसाव होता रहता है। समय रहते इसकी जांच न होने पर यही रिसाव आग का कारण बन सकता है।
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सीएफओ जसबीर सिंह ने बताया कि पूर्व के हादसों में गैस सिलिंडर लीकेज के मामले सामने आए हैं। सिलिंडर में सप्लाई पिन के पास अक्सर हल्का रिसाव रहता है। बाद में रिसाव बढ़ने पर आग लग सकती है। सिलिंडर में आग लगने के बाद तापमान काफी बढ़ने पर वह फटता है।
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ऐसे में परिवारों को एजेंसी से आने वाले सिलिंडर की जांच करने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए। मलवां हादसे में मलबा हटने के बाद सिलिंडर की स्थिति स्पष्ट होगी। हादसे वाला सिलिंडर किस गैस एजेंसी का था, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी। हालांकि परिजन सिलिंडर भारत गैस एजेंसी का होने की बात बता रहे हैं।
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तीन किमी दूर फिर फटा गैस सिलिंडर, चार मौतों से दहले थे लोग
फतेहपुर में पांच माह बाद घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर रसोई गैस सिलिंडर के धमाके ने लोगों को फिर दहला दिया। सोमवार को हुए हादसे में चार लोगों की मौत ने आसपास के लोगों को झकझोर दिया। वहीं घटना ने 17 मई को कल्यानपुर थाना क्षेत्र के पिलखनी गांव में हुए सिलिंडर हादसे की याद ताजा कर दी।