11 दिसंबर से 6 फरवरी 2018 तक शुक्र अस्त रहेंगे। जबकि 15 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। यहां पर सूर्य 14 जनवरी 2018 तक रहेंगे। इस कालखंड को खरमास कहते हैं। इस कारण 11 दिसंबर से 6 फरवरी तक मांगलिक कार्यक्रम वर्जित रहेंगे।
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खरमास कब से कब तक, जानिए आखिर क्यों इस कालखंड में वर्जित होते हैं 'मांगलिक कार्यक्रम'
राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 11 Dec 2017 09:04 AM IST
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पंडित केए दुबे पद्मेश और आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि 7 से 22 फरवरी तक ही मांगलिक कार्यक्रम होंगे। 23 फरवरी से 2 मार्च तक होलाष्टक रहेंगे। इस कालखंड में भी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होते हैं।
13 मार्च से 13 अप्रैल 2018 तक सूर्य मीन राशि में रहेंगे। इस कालखंड को खरमास कहते हैं। इस दौरान भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि धर्म सिंधु के अनुसार वसंत पंचमी के दिन कोई भी मांगलिक कार्यक्रम पंचांग शुद्धि के बिना भी किए जा सकते हैं।
इसलिए 22 जनवरी 2018 को वसंत पंचमी के दिन मांगलिक कार्यक्रम होंगे और यह अपवाद के रूप में रहेगा।
13 मार्च से 13 अप्रैल 2018 तक सूर्य मीन राशि में रहेंगे। इस कालखंड को खरमास कहते हैं। इस दौरान भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि धर्म सिंधु के अनुसार वसंत पंचमी के दिन कोई भी मांगलिक कार्यक्रम पंचांग शुद्धि के बिना भी किए जा सकते हैं।
इसलिए 22 जनवरी 2018 को वसंत पंचमी के दिन मांगलिक कार्यक्रम होंगे और यह अपवाद के रूप में रहेगा।
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खरमास कहते हैं
जब सूर्य बृहस्पति की राशि धनु और मीन में होता है तो उसे खरमास कहते हैं। इस खरमास में मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होते हैं।
जब सूर्य बृहस्पति की राशि धनु और मीन में होता है तो उसे खरमास कहते हैं। इस खरमास में मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होते हैं।
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इसलिए होते हैं मांगलिक कार्यक्रम वर्जित
बृहस्पति (गुरु) ग्रह को देवताओं का गुरु भी माना गया है। अत: जब सूर्य गुरु की राशि धनु व मीन में प्रवेश करते हैं तो ऐसी मान्यता है कि देव गरु और सूर्य भगवान की मंत्रणा चलती है। वह स्वयं साधना में व्यस्त होते हैं। मांगलिक कार्यक्रमों में सूर्य और विवाह कार्यक्रमों में देव गुरु बृहस्पति के पूजन के बिना लाभ प्राप्त नहीं होता। इसलिए धनु संक्रांति एवं मीन संक्रांति के दौरान मांगलिक कार्यक्रम एक-एक माह के लिए वर्जित होते हैं।
बृहस्पति (गुरु) ग्रह को देवताओं का गुरु भी माना गया है। अत: जब सूर्य गुरु की राशि धनु व मीन में प्रवेश करते हैं तो ऐसी मान्यता है कि देव गरु और सूर्य भगवान की मंत्रणा चलती है। वह स्वयं साधना में व्यस्त होते हैं। मांगलिक कार्यक्रमों में सूर्य और विवाह कार्यक्रमों में देव गुरु बृहस्पति के पूजन के बिना लाभ प्राप्त नहीं होता। इसलिए धनु संक्रांति एवं मीन संक्रांति के दौरान मांगलिक कार्यक्रम एक-एक माह के लिए वर्जित होते हैं।