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श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता में बोले छात्र- एक चुनाव से खर्च और समय की बचत

Sat, 31 Aug 2019 05:25 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 31 Aug 2019 05:25 PM IST
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discussion on one country-one election system in Shri MurariLal Maheshwari debate competition kanpur
कानपुर में श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला
सामाजिक सरोकारों की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार को कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज, बेनाझाबर में मंडल स्तरीय ‘श्री मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता’ का आयोजन किया।


मंडल से जुड़े छह जिलों कानपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा, औरैया और फर्रूखाबाद के 17 प्रतिभागियों ने शिरकत की। पीपीएन कॉलेज की छात्रा मुदिता मिश्रा को विजेता घोषित किया गया। अर्मापुर पीजी कॉलेज के किशन सिंह दूसरे व पीपीएन कॉलेज के अमन शुक्ला तीसरे स्थान पर रहे।

पीएसएम कन्नौज के श्रीनाथ पांडेय और एजीएमआईसी, कन्नौज के प्रशांत शुक्ला को सांत्वना पुरस्कार मिला। सभी प्रतिभागियों ने ‘देशहित में एक देश-एक चुनाव’ विषय के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे।
discussion on one country-one election system in Shri MurariLal Maheshwari debate competition kanpur
कानपुर में श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला
पक्ष के प्रतिभागियों ने कहा कि एक देश-एक चुनाव से देश पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा और समय की बचत होगी। विपक्ष के प्रतिभागियों ने तर्क दिया कि इससे मतदाता कंफ्यूज हो जाएगा। सरकार को सबसे पहले मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।

निर्णायक मंडल में अर्मापुर पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गायत्री सिंह, डीजी पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. साधना सिंह और कानपुर विद्या मंदिर गर्ल्स पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मृदुला शुक्ला रहीं। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत और विशिष्ट अतिथि बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज के निदेशक डॉ. अंगद सिंह रहे।
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कानपुर में श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला
सभी विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए गए जबकि अन्य सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया गया। बीएनएसडी की छात्रा भावनी अवस्थी ने कार्यक्रम का संचालन किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. ममता तिवारी, रश्मि मिश्रा, दीपक मिश्रा, विजय सिंह, रजनी खन्ना सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

पक्ष में बोले, देश के विकास के लिए एक चुनाव जरूरी

देशहित में एक देश-एक चुनाव विषय के पक्ष में प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसा होने से देश का विकास तेजी से होगा। बार-बार चुनाव होने से आर्थिक बोझ बढ़ता है। करीब तीस हजार करोड़ रुपये एक बार चुनाव कराने में खर्च हो जाते हैं। अगर इस रकम को बचाया जाए तो इसका उपयोग देश की गरीब जनता के विकास के लिए हो सकता है। बार-बार चुनाव के चलते सरकारी अफसर, कर्मचारी, मंत्री सब परेशान हो जाते हैं। चुनाव के दौरान दो से तीन माह तक सारे कामकाज ठप हो जाते हैं। इस प्रक्रिया के चलते भी लाखों करोड़ों का नुकसान होता है। इसे भी बचाया जा सकेगा।
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कानपुर में श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला
विपक्ष में बोले, संविधान पर प्रहार से कैसे चलेगा देश

विपक्ष में प्रतिभागियों ने संविधान का हवाला दिया। कहा कि ऐसा करने से संविधान पर प्रहार होगा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 13 दिनों वाली सरकार का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि क्या अगर ऐसी परिस्थिति बनती है जब किसी राज्य सरकार गिर जाए तो पूरे देश में एकसाथ फिर चुनाव कराने होंगे। इस तरह से संविधान का मजाक बन जाएगा। प्रतिभागियों ने यह भी तर्क दिया कि जिस तरह से हमारे देशवासी हर साल अलग-अलग त्योहार मना सकते हैं तो क्या लोकतंत्र के इस खूबसूरत त्योहार को बार-बार नहीं मना सकते।

विजेताओं के बोल

संदेह करने वाले हमेशा देश को पीछे ले जाने पर तुले रहते हैं। इनकी नकारात्मक सोच कभी देश का भला नहीं कर सकती। हर बार चुनाव कराने में देश का करीब 30 हजार करोड़ रुपया खर्च होता है। ऐसे लगभग हर साल किसी न किसी प्रदेश का चुनाव होता है। अगर यह सभी चुनाव एक बार में ही हो जाएं तो लाखों करोड़ों रुपयों की बचत होगी जिसे देश के विकास में लगाया जा सकता है।
- मुदिता मिश्रा, छात्रा पीपीएन कॉलेज
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कानपुर में श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला
एक देश एक चुनाव संभव नहीं है। ऐसा होने से संविधान का मूल स्वरूप ही बदल जाएगा। यह देश के लिए घातक हो सकता है। याद है न अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार 13 दिनों में गिर गई थी। यही स्थिति एक देश एक चुनाव का नियम लागू होने के बाद होगी तो पूरे देश में दोबारा चुनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। संविधान की कई धाराएं, कानून इससे प्रभावित हो जाएंगी।
- किशन सिंह, छात्र, अर्मापुर डिग्री कॉलेज

अगर एक चुनाव होगा तो इससे क्षेत्रीय राजनीतिक दलों पर संकट आ जाएगा। अभी केवल देश की 30 प्रतिशत जनता की सरकार बनाने के लिए अपने मताधिकारों का प्रयोग कर रही है। इसे सुधारने की जरूरत है। जनता को चुनाव के लिए जागरूक करने की जरूरत है। एक देश एक चुनाव से देश की अधिकांश जनता गुमराह हो जाएगी। इसका सकारात्मक फायदा कुछ नहीं होगा बल्कि उल्टे नकारात्मकता देश पर हावी हो जाएगा।
- अमन शुक्ला, छात्र, पीपीएन कॉलेज
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