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PHOTOS: पुलिस के ‘सुल्तान’ बनकर गांव आए DGP सुलखान ,चूल्हे पर बनी टिक्कड़ रोटी खाई
विवेक सिंह/बलराम सिंह, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 05 Aug 2017 08:00 AM IST
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अपने पैतृक गांव में डीजीपी सुलखान अपनी मां के साथ
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पुलिस के ‘सुल्तान’ बनकर बांदा (जौहरपुर) अपने पैतृक गांव आए DGP सुलखान सिंह घरवालों के बीच पूरी तरह घुल-मिल गए। गांव में बिताए बचपन के दिन उन्हें खूब याद आए। गांव के बुजुर्गों ने भी याद दिलाए। साढ़े तीन घंटे पुरानी यादों में बिताए। माता-पिता के पैर छू कर आशीर्वाद लिया और गांव के बुजुर्गों से हाथ जोड़कर अभिवादन किया।
डीजीपी सुलखान सिंह लखनऊ से अपनी सरकारी कार पर चलकर शुक्रवार को दोपहर 3:55 बजे तिंदवारी थाना क्षेत्र में स्थित पैतृक गांव जौहरपुर पहुंचे। पुलिस का मुखिया बनने के बाद वह पहली बार यहां आए थे। हालांकि इसके पहले भी लंबे अरसे तक नहीं आ सके। गांव में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक और अपनों से लेकर परायों में उत्साह और खुशी थी। गांव वालों का कहना था कि उनका सुलखान अब पुलिस का ‘सुल्तान’ बन गया है। बाजे-गाजे के साथ स्वागत हुआ। पैतृक घर पहुंचते ही पहले पिता लाखन सिंह के पैर छुए। उनका आशीर्वाद लेने के बाद बरामदे में बैठी मां के पैर छुए और उनके पास पुरानी खाट पर बैठ गए। साथ में पत्नी सुमन सिंह भी थीं। लंबे अरसे के बाद बेटे के दीदार हुए और वह भी प्रदेश की एक हस्ती के रूप में तो बूढ़ी मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। मां और घर वालों का हालचाल लिया।
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डीजीपी सुलखान सिंह लखनऊ से अपनी सरकारी कार पर चलकर शुक्रवार को दोपहर 3:55 बजे तिंदवारी थाना क्षेत्र में स्थित पैतृक गांव जौहरपुर पहुंचे। पुलिस का मुखिया बनने के बाद वह पहली बार यहां आए थे। हालांकि इसके पहले भी लंबे अरसे तक नहीं आ सके। गांव में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक और अपनों से लेकर परायों में उत्साह और खुशी थी। गांव वालों का कहना था कि उनका सुलखान अब पुलिस का ‘सुल्तान’ बन गया है। बाजे-गाजे के साथ स्वागत हुआ। पैतृक घर पहुंचते ही पहले पिता लाखन सिंह के पैर छुए। उनका आशीर्वाद लेने के बाद बरामदे में बैठी मां के पैर छुए और उनके पास पुरानी खाट पर बैठ गए। साथ में पत्नी सुमन सिंह भी थीं। लंबे अरसे के बाद बेटे के दीदार हुए और वह भी प्रदेश की एक हस्ती के रूप में तो बूढ़ी मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। मां और घर वालों का हालचाल लिया।
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पुरानी यादें ताजा हो गईं
अपने गांव के लोगों से मिलते डीजीपी सुलखान सिंह
शाम 4:36 बजे डीजीपी घर के बाहर नीम के पेड़ तले उनके इंतजार में खाट और कुर्सियों पर बैठे लोगों के बीच पहुंच गए। पुरानी यादें ताजा हो गईं। बुजुर्गों ने उनका बचपना याद दिलाया। इसी बीच गांव के प्राइमरी स्कूल के अध्यापक स्कूल का वह पुराना दाखिला रजिस्टर लेकर आ गए जिसमें 1964 में दूसरी कक्षा में उनका नाम (क्रम संख्या-196) दर्ज था। डीजीपी ने यह रजिस्टर बेहद दिलचस्पी से देखा और अपने मोबाइल पर इसके फोटोग्राफ लिए। अपने जमाने के शिक्षकों की तारीफ करते हुए कहा कि तब शिक्षक भी पढ़ाने में बहुत मेहनत करते थे। उन्होंने अपने स्कूल के शिक्षक शिव प्रसाद श्रीवास्तव, कामता प्रसाद मिश्र और वफाती साहब का नाम लेकर सराहना की। डीजीपी पूरे समय लोगों से हंसते और हंसाते रहे। अपने पूरे घर का वीडियो बनाया। शाम 7:23 बजे डीजीपी बांदा के लिए रवाना हो गए।
‘अमर उजाला’ के सवाल पर बयां की बचपन की शैतानी
डीजीपी सुलखान सिंह
डीजीपी को गांव में बचपन की कुछ शैतानियां भी याद आ गईं। बुजुर्गों के बीच बैठ कर पुरानी बातों का बाजार गर्म था तभी ‘अमर उजाला’ ने उनसे सवाल कर लिया कि बचपन का कोई ऐसा वाक्या बयां करें जो अभी तक भूला न हो। सुलखान सिंह खिलखिला कर हंस पड़े। बोले-एक नहीं कई यादें हैं। लेकिन सबके सामने नहीं बता जा सकता। बोले-एक वाक्या बताता हूं। मित्रों के साथ एक बार बीड़ी पी ली थी। यह बात किसी ने घर में पिता को बता दी। घर लौटा तो अम्मा ने बता दिया कि पिता जी को उनकी हरकत पता चल गई है। इस पर वह मारे डर के गेहूं के बोरों के बीच में छिप गए। पिटाई से तो बच गए लेकिन डांट खानी ही पड़ी। यह उनके लिए काफी थी। स्कूल का पुराना रजिस्टर में सहपाठियों के नामों पर उन्हें हंस कर याद किया। यह भी बताया कि हाईस्कूल में सिर्फ दो नंबरों से ‘आनर’ (75 प्रतिशत) मिलने से चूक गए। इंटर में यह हासिल करने में तीन नंबर कम पड़ गए। इंजीनियरिंग में 74.6 प्रतिशत नंबर मिले। डीजीपी ने यह भी बताया कि संस्कृत में उन्हें सबसे ज्यादा नंबर मिलते थे। आठवीं कक्षा में संस्कृत में 50 में 48 और हाईस्कूल में 100 में 85 नंबर मिले थे।
मां की पकाई बेर्रा की रोटी और चौराई खाई
डीजीपी सुलखान सिंह अपनी मां के साथ खाना खाते हुए
पुलिस के बहुत बड़े अफसर हो गए बेटे को अपने हाथ का बना खाना परोसने और खिलाने की मां करुणा देवी की तमन्ना पूरी हो गई। पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह ने मां के हाथों चूल्हे में बना सादा खाना बेहद शौक से खाया। बगल में बैठ कर मां ने दुलारते हुए खिलाया। गौरतलब है कि मां करुइया देवी उर्फ करूणा सिंह ने गुरुवार को ‘अमर उजाला’ से कहा था कि ‘अपने हाथन से रोटी, दार और चौरइया की सब्जी पका कै खिलहियों, या सब वहिका बहुत पसंद है’। शुक्रवार को शाम यही हुआ। बेटे की आमद पर मां ने यही खाना बनाया। डीजीपी सुलखान सिंह ने मां के हाथों बनी बेर्रा की रोटी और चोराई की सब्जी व दाल शौक से खाई। उनके बगल में मां बैठी रहीं। साथ में पत्नी सुमन सिंह भी पूरे समय अपनी सास के साथ रहीं।
मां को साथ ले जाएंगे लखनऊ
डीजीपी सुलखान सिंह
डीजीपी बनने के बाद अति व्यस्तता के चलते सुलखान सिंह अपनी पूज्य माता के साथ वक्त नहीं बिता सके। लेकिन अब इसकी भरपाई करेंगे। शुक्रवार को उन्होंने यहां मां से कहा कि कल तैयार रहें। उन्हें अपने साथ लखनऊ ले चलेंगे। यानि शनिवार को लखनऊ लौटते वक्त डीजीपी एक बार फिर पैतृक गांव में दस्तक देंगे।
गांव के बेरोजगारों को भर्ती के लिए दी तैयारी की सलाह
डीजीपी सुलखान सिंह
पुलिस मुखिया को अपने बीच पाकर गांव के शिक्षित बेरोजगारों की उम्मीदें जुबां पर आ गईं। कुछ बुजुर्गों ने वहां मौजूद बेरोजगार युवाओं की तरफ इशारा करते हुए सुलखान सिंह से कहा कि-‘साहब ! इनको भी नौकरी दिवा देओ’। डीजीपी बोले-अगले माह 4600 पुलिस की भर्ती हो रही है। आप लोग तैयारी करें। किसी के बहकावे में न आएं। दलाल के चक्कर में न आएं। भर्ती साफ-सुथरी होगी। उधर, जौहरपुर गांव के प्रधान प्रतिनिधि शानू सिंह ने डीजीपी से गांव में इंटर कालेज खुलवाने का अनुरोध किया। और भी कई लोगों ने अपनी अर्जियां दीं।
डीजीपी के नाम पर मीडिया को रोका
डीजीपी सुलखान सिंह
डीजीपी ने गांव में किसी को मायूस या नाखुश नहीं किया। जिसने चाहा वही उनसे मिल लिया। लेकिन बांदा पुलिस के अफसरों को डीजीपी के साथ उनके गांव में मीडिया का रहना गवारा नहीं हुआ। लिहाजा सुबह से ही तिंदवारी कोतवाली इंस्पेक्टर प्रतिमा सिंह समेत कई दरोगा और पुलिस कर्मी मीडिया को बैरंग लौटाने के लिए डट गए। यह मंशा डीजीपी की बताते हुए मुख्यालय से गए मीडिया वालों को रोक दिया। हालांकि डीजीपी शनिवार को दोपहर दो बजे बांदा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मीडिया से मुलाकात करेंगे।
10 वर्षों बाद बांदा में डीजीपी आए
डीजीपी सुलखान सिंह
पिछले एक दशक में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक की बांदा जनपद में यह दूसरी बार आमद थी। इसके पहले ठीक 10 साल पहले 23 जुलाई को फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन गांव में दस्यु ठोकिया द्वारा छह एसटीएफ जवानों की सामूहिक हत्या किए जाने पर तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह हेलीकाप्टर से बांदा आए थे। उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। एडीजी बृजलाल भी थे। उसके बाद अब डीजीपी सुलखान सिंह की बांदा आमद हुई है।