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'कालेधन का काला खेल', जांच एजेंसियों के निशाने पर अफसर, नेता और कारोबारी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 18 Jan 2018 10:53 AM IST
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पकड़े गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के कानपुर शहर के बिल्डर आनंद खत्री और 15 अन्य लोगों के पास से मिली करीब 97 करोड़ रुपये के पुराने नोटों की करेंसी किसी नेता, अफसर या कारोबारी का कालाधन हो सकता है। आयकर विभाग का ऐसा अनुमान है। माना जा रहा है कि नोट बदलने के झांसे में यह अब बाहर निकलकर आया है।
पकड़े गए आरोपी
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अफसरों का कहना है कि नोटबंदी लागू होने के दिन 500 रुपये के 1716.6 करोड़ नोट और एक हजार रुपये के आठ करोड़ नोट बाजार में थे। इस तरह से 15.44 लाख करोड़ रुपये के नोट प्रचलन में थे। इनमें से 15.28 लाख करोड़ रुपये रिजर्व बैंक के पास वापस आ चुके हैं।
पकड़े गए आरोपी
करीब एक फीसदी करेंसी वापस आने से रह गई है। यानी 16050 करोड़ रुपये के हजार और पांच सौ के नोट रिजर्व बैंक में जमा नहीं हुए। रिजर्व बैंक ने इसे ही कालाधन माना है। विभिन्न शहरों में बरामद हो रहे नोट इसी का हिस्सा हैं। आने वाले समय में ऐसे धन की और बरामदगी हो सकती है। पकड़े गए लोगों को कालेधन का संरक्षक माना जा रहा है। विभिन्न जांच एजेंसियां इनके खिलाफ सक्रिय हो गई हैं। पकड़े गए आरोपियों से इन नोटों के असली मालिक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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पकड़े गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
एक अधिकारी ने आशंका जताई कि जो लोग पकड़े जा रहे हैं वे तो दोषी हैं ही, लेकिन असली मास्टरमाइंड वे लोग हैं जिनका ये धन है। आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियां इन्हीं की तलाश में जुटी हैं। माना जा रहा है कि बैंक खातों में जमा करने पर जांच एजेंसियों की निगाह में आने की आशंका में कालेधन के कुबेरों ने पुराने नोट समय पर जमा नहीं किए।