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दशानन रावण का 100 वर्ष पुराना वो मंदिर जहां सिर्फ आज के दिन होते है दर्शन, जानिए क्या है मान्यता

Sun, 25 Oct 2020 12:47 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 25 Oct 2020 12:47 PM IST
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Dashanan Ravana's 100-year-old temple where only present day darshan, know what is the recognition
कानपुर में है रावण मंदिर - फोटो : amar ujala
पूरा देश जहां दशहरा के दिन रावण दहन कर खुशियां मनाता है, वहीं कुछ लाेग ऐसे भी हैं जाे रावण के सौ साल पुराने मंदिर में विशेष अराधना करते हैं। यह पूजा केवल दशहरे के दिन ही हाेती है। कानपुर के शिवाला में दशानन शक्ति के प्रहरी के रूप में विराजमान हैं। विजयदशमी को सुबह मंदिर में प्रतिमा का श्रृंगार-पूजन कर कपाट खोले जाते हैं। शाम को आरती उतारी जाती है।


 
Dashanan Ravana's 100-year-old temple where only present day darshan, know what is the recognition
मंदिर में दर्शन के लिए लगी लंबी लाइन - फोटो : amar ujala
यह कपाट साल में सिर्फ एक बार दशहरा के दिन ही खुलते हैं। मां भक्त मंडल के संयोजक केके तिवारी बताते हैं कि वर्ष 1868 में महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने मंदिर का निर्माण कराया था। वे भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्होंने ही कैलाश मंदिर परिसर में शक्ति के प्रहरी के रूप में रावण का मंदिर निर्मित कराया था। मान्यता है कि दशानन मंदिर में दशहरे के दिन लंकाधिराज रावण की आरती के समय नीलकंठ के दर्शन श्रद्धालुओं को मिलते हैं।

 
Dashanan Ravana's 100-year-old temple where only present day darshan, know what is the recognition
शिवाला कैलाश मंदिर स्थित रावण के मंदिर में दर्शन करते लोग - फोटो : amar ujala
महिलाएं दशानन की प्रतिमा के करीब सरसों के तेल का दीया और तरोई के फूल अर्पित कर सुख समृद्धि, पुत्र और परिवार के लिए ज्ञान व शक्ति की कामना की। भक्त दशानन से विद्या और ताकत का वर मांगते हैं। अहंकार न करने का भी संदेश रावण प्रकांड विद्वान और ज्ञानी था, लेकिन उसे खुद के पराक्रम का घमंड भी आ गया था।


 
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Dashanan Ravana's 100-year-old temple where only present day darshan, know what is the recognition
रावण की पूजा करते भक्त - फोटो : amar ujala
मान्यता है कि मंदिर में दशानन के दर्शन करते समय भक्तों को अहंकार नहीं करने की सीख भी मिलती है, क्योंकि ज्ञानी होने के बाद भी अहंकार करने से ही रावण का पूरा परिवार मिट गया था। शिवाला स्थित दशानन मंदिर का पट रविवार की सुबह खुला तो विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया। रविवार को प्रातः मंदिर सेवक ने मंदिर के पट खोले तो भक्तों ने साफ सफाई करके दशानन की प्रतिमा को दूध, दही गंगाजल से स्नान कराया।

 
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Dashanan Ravana's 100-year-old temple where only present day darshan, know what is the recognition
रावण - फोटो : गूगल
इसके बाद विभिन्न प्रकार के पुष्पों से मंदिर को सजाया गया और आरती उतारी गई। भक्त मंडल के संयोजक केके तिवारी ने बताया कि संक्रमण के चलते इस बार आरती में सीमित संख्या में ही भक्त शामिल हुए। महिलाओं ने मंदिर में सरसों के तेल का दीप जलाकर सुख समृद्धि की कामना की और पुत्र और परिवार के लिए ज्ञान और शक्ति की कामना की।
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