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पुलवामा आतंकी हमला: तिरंगे से लिपटा शहीद प्रदीप का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, दर्द से तड़प उठी बेटी
Sun, 17 Feb 2019 01:07 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 17 Feb 2019 01:07 AM IST
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तिरंगे का सम्मान हर किसी को नसीब नहीं होता है। इस सम्मान को हासिल करने वाले वो सिपाही होते हैं जो वतन के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर देते हैं। कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में यूपी के कन्नौज जिले का लाल प्रदीप भी शहीद हुआ। शहीद प्रदीप के अंतिम दर्शनों के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।
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शनिवार को शहीद प्रदीप का पार्थिव शरीर जब उनके गांव पहुंचा तो वहां मौजूद हजारों की भीड़ एक आवाज में प्रदीप यादव अमर रहें के नारे लगाने लगी। ये वो प्यार है जो सिर्फ उन्हीं को मिलता है जो भारत के लिए अपनी जान को दांव पर लगा देते हैं। मंत्री अर्चना पांडेय ने शहीद प्रदीप को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
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कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में यूपी के कन्नौज जिले का लाल शहीद हो गया। तिर्वा के सुखसेनपुर निवासी जवान प्रदीप सिंह यादव भी उस बटालियन में शामिल थे, जिसे आंतकियों ने निशाना बनाया। गुरुवार रात में यह खबर आई तो परिजनों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
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तीन दिन पहले छिबरामऊ के शाहजहांपुर निवासी सेना में हवालदार रहे सूर्यप्रताप सिंह की कश्मीर के उरी में हुई मौत की खबर का गम जिला भूल नहीं पाया था कि गुरुवार को पुलवामा में हुई आतंकी घटना में जिले के लाल की शहादत ने सभी को झकझोर दिया। तिर्वा के अजान-सुखसेनपुर निवासी प्रदीप सिंह यादव सीआरपीएफ में थे। गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में साथियों के साथ प्रदीप भी शहीद हो गए। शहादत की खबर से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। गांव में भी मातम का माहौल है।
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एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रदीप की शहादत की पुष्टि की थी। प्रदीप सिंह यादव श्रीनगर में 115 बटालियन में सिपाही थे। चार दिन पहले छुट्टी गुजार कर लौटे थे। एक मकान कानपुर के बारा सिरोही में है। वहां पत्नी नीरज देवी और दो बेटियां 10 वर्षीय सुप्रिया यादव और ढाई साल की सोना यादव हैं। 10 फरवरी को परिवार से विदा होकर वह जम्मू रवाना हुए थे। 11 जनवरी को वह जम्मू पहुंचे।