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चीन खत्म कर रहा ‘चंबल के कछुए’

Sat, 17 Dec 2016 05:49 PM IST
हिमांशु गुप्ता, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु गुप्ता, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 17 Dec 2016 05:49 PM IST
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tortoise trafficking from auraiya chambal
इस तरह औरैया से हो रही कछुओं की तस्करी
औरैया चंबल सेंचुरी से ‘कछुओं की ट्रैफिकिंग’ तेजी से की जा रही है। इनकी कछुओं की सप्लाई चीन, थाईलैंड और बांग्लादेश में हो रही है। जिले के पंचनद पर कछुआ तस्कर सक्रिय है। चीन की डिमांड चंबल सेंचुरी(पंचनद)  के कछुओं को खत्म कर रही है। सर्दियां आते ही पंचनद की चंबल सेंचुरी में कछुआ तस्करी का कारोबार चल उठता है। वन वन विभाग और पुलिस महकमे ने हाल ही में सतर्कता बरतते हुए छापेमारी की मगर एक भी तस्कर हाथ नही लगे। 2012 में बंगाल के चार तस्कर पकड़े गए थे जिन्होने चीन तक खेप भेजने की बात स्वीकार की थी। 

चंबल में हैं कछुओं की सात प्रजातियां

tortoise trafficking from auraiya chambal
सात प्रजातियां पाई जाती हैं यहां
पंचनद की चंबल सेंचुरी में यमुना और चंबल समेत इनकी सहायक नदियों में कछुओं की सात प्रजातियां- धोंड, धमौका, साल, पचेड़, कटहेवा, सुंदरी, भारतीय सितारा की प्रजाति पाई जाती हैं।  स्थानीय लोग कछुआ पकड़ कर गैर राज्य से आने वाले तस्करों को बेंच देते है। जिसके बाद यहां से बिहार और पश्चिम बंगाल से लेकर ठंडे प्रदेशों तक इनकी तस्करी की जाती है। नंबवर से मार्च तक कछुओं को पकड़ने के लिए नदियों के आस-पास तस्करों का जमावड़ा लगने लगता है।

ब्लैकपांड टर्टल की डिमांड चीन में सबसे ज्यादा

tortoise trafficking from auraiya chambal
इस प्रजाति के कछुए की डिमांड सबसे ज्यादा
ब्लैकपांड कछुआ की मांग चीन में सबसे अधिक है जिसके कारण यह प्रजाति अब यहां विलुप्त होने की कगार पर है। ब्लैकपांड टर्टल जैसे कछुओं की मांग बढ़ने के पीछे खास वजह उनका बेहद खूबसूरत होना है। वास्तु शास्त्रियों का भी मानना है कि इस कछुओं को घर में रखे जाने से सुख-समृद्धि आती है। यह कछुआ काले रंग का और कुछ पीले धब्बे होते है। टरटलवाइज एंड इंटरनेश्नल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में केवल खोल की जेली बनाने के लिए ही सालाना 73 हजार कछुए मारे जाते हैं। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्लूडब्लूएफ) का मानना है कि इस जबरदस्त मांग को पूरा करने के लिए भारत से इन कछुओं की तस्करी की जाती है। 
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चीन-थाईलैंड के लोग बनाते हैं कछुआ मांस का चिप्स व सूप

tortoise trafficking from auraiya chambal
कछुए का मांस भी विदेश में खूब पसंद किया जाता है
वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में काम कर रहे सोसायटी फार कंजरवेशन आफ नेचर के सचिव डा. राजीव चौहान के अनुसार इसका यौनवर्धक दवाओं में भी प्रयोग किया जाता है। 1979 में सरकार ने चंबल नदी के लगभग 425 किलोमीटर में फैले तट से सटे हुए इलाके को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घोषित किया था।  इसमें से 635 वर्ग किलोमीटर उत्तर प्रदेश के आगरा, इटावा व औरैया में है। चीन व थाईलैंड के लोग कछुए के मांस को पसंद करते हैं। इन तमाम देशों में कछुए के सूप और चिप्स की जबरदस्त मांग है। 
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अब तक यहां से पकड़े गए कछुआ तस्कर 

tortoise trafficking from auraiya chambal
कछुआ तस्करों पर नहीं हो रहा शिकंजा
- 05 जनवरी 2015 को पुलिस ने 222 कछुओं को वैन के साथ महिला तस्कर व उसके दो साथियों को दबोचा। 
- 17 जनवरी 2015 के सदर कोतवाली पुलिस ने दिबियापुर रोड पर बाइक में बोरे में भरे कछुओं की खेप को दबोचा। 
-09 जनवरी 2012- पुलिस ने जालौन चौराहा से ट्रक से 68 बोरा कछुआ पकडे। पश्चिम बंगाल के चार तस्करों को दबोचा। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने यमुना में छोड़ा।
- 02जून 2013 में अछल्दा थाना क्षेत्र के गांव नगला चिंता गांव में एक मकान में भूसे में रखे 160 कछुआ बरामद किए।
- 14 मई 2014- अयाना थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर हसुलिया चौराहा के पास दुर्घटनाग्रस्त लोडर से दुलर्भ प्रजाति को पुलिस ने 158 कछुआ बरामद किया। 
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