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तस्वीरों में मौत का मंजर: कानपुर में एक दिन में 496 अंतिम संस्कार, देर रात तक जलती रहीं चिताएं
Sun, 25 Apr 2021 05:49 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 25 Apr 2021 05:49 AM IST
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देर रात तक हो रहे अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
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महामारी के बीच कोरोना और अन्य बीमारियों से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को शहर के दोनों विद्युत शवदाह गृहों और श्मशान घाटों में 496 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। साथ ही कब्रिस्तानों पर भी जनाजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
हर ओर जल रहीं चिताएं
- फोटो : amar ujala
यहां शनिवार को 40 शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। आम दिनों में घाटों पर औसतन 90 से 100 और कब्रिस्तानों पर 20 से 25 शवों का अंतिम संस्कार होता था। कुछ घाटों पर जगह की कमी के चलते सूर्यास्त के बाद भी अंतिम संस्कार करने पड़े।
कानपुर में हालात बेकाबू
- फोटो : amar ujala
जबकि, बर्रा के स्वर्ग आश्रम और पास में स्थित पार्क में भी जगह न बचने पर शाम को चार शवों का अंतिम संस्कार रविवार को करने के लिए टोकन देने पड़े। उधर, मुस्लिम कब्रिस्तानों में भी जनाजे दफनाने की तादाद बढ़ी है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में करीब 30 कब्रिस्तान हैं।
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कुछ ऐसा है मंजर
- फोटो : amar ujala
इनमें अवामी कब्रिस्तान, ईदगाह, नगर निगम कब्रिस्तान बजरिया, बगाही कब्रिस्तान, बेगमपुरवा, जाजमऊ कब्रिस्तान, बेनाझाबर का तकिया नब्बू शाह, तकिया छेदी शाह, कर्नलगंज का तकिया बिसातियान, रावतपुर गांव कब्रिस्तान, मसवानपुर का गंज शहीदा कब्रिस्तान प्रमुख हैं। एक महीने पहले इन प्रमुख कब्रिस्तानों में करीब 20-25 जनाजों के दफन होने का औसत था। अब इनमें रोजाना औसत 40 जनाजे दफन हो रहे हैं। बात शहर भर के करीब 30 कब्रिस्तानों की की जाए, तो यह संख्या बढ़ जाएगी।
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दिल दहला देने वाला है घाटों का मंजर
- फोटो : amar ujala
आसपास के जिलों से मंगाईं लकड़ियां
नगर निगम इटावा, जालौन, फतेहपुर, सीतापुर, कानपुर देहात आदि जिलों से लकड़ियां मंगाकर विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार करा रहा है। अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र श्रीवास्वत ने बताया कि एक शव के अंतिम संस्कार में करीब पांच क्विंटल लकड़ी लगती है। यह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
नगर निगम इटावा, जालौन, फतेहपुर, सीतापुर, कानपुर देहात आदि जिलों से लकड़ियां मंगाकर विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार करा रहा है। अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र श्रीवास्वत ने बताया कि एक शव के अंतिम संस्कार में करीब पांच क्विंटल लकड़ी लगती है। यह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।