दोस्तों हम लोगन का पुलवामा अटैक मा शहीद भये जवानन केर बलिदान का कभों नाही भुलाय का चाहि.. उनके परिवार का सम्मान करे का चाहि.. उनके परिवार के साथ खड़े रहे का चाहि.. अरे हमरा तो कलेजा फट गवा रहै जब शहीद के परिवारजन मिट्टी से लिपट लिपट के रोआवत रहें.. अउर ओसे भी जादा दु:ख उन लोगन केर है जिनका आपन सपूत से लिपट के रोवे खातिर ओकी डेड बॉडीयो तक नाय मिलि..
अइसेहे एक माताजी का सदमा हुई गवा रहै जब ओका लरिका ई धमाके के बाद नाही मिला.. जब सेना केर अफसर उनके घरे आय तो सबै गाँव वाले उनके घर के आगे भीड़ लगाय रहें.. सेना केर अफसर आय. तो उई अफसर से कहे लाग अरे हमरौ लरिका रमाकांत सेना मा होय.. उई नाही आवा का,..
सेना केर एक अधिकारी उनका बताईन कि पुलवामा मा आतंकवादी हमला भवा है अउर ओके बाद से तोहार लरिका नाही मिलि रहा.. उई अम्मा अफसर से काहे लागी अरे साहब हमार लरिका रमाकांत बचपनै से बहुत चंचल होय.. उई वही कहूँ आपन दोस्तन अउर संगी साथिन के साथ हुईहैं.. देखौ कहूँ दूसर बस मा हुईहैं.. यू अइसेहे बचपन मा भी करत रहा.. ठीक से ढूंढो वही हुईहैं..
ऊ जरूर कौनो दूसर बस मा होई.. अबकी आवा रहै तो हमका चिढ़ावत रहा.. कहत रहा कि अम्मा तुम्हार सब दांत गिरी गे.. जब तुम बोलति हौ तो तुम्हरे मुँहे से फुसुर फुसुर हवा निकलत है.. अबकी छुट्टी मा घरे अईबै तो मलिटरी अस्पताल मा तुमका लई जइबै अउर तुम्हरे नयी बत्तीसी लगवाय देबे.. फिर खूब गट्टा, गंडेरी, चना चबैना खायेव.. बताओ अईस मखोल करत है..
अबकी जब रमाकांत छुट्टी बाद वापस ड्यूटी पे जाय लाग तो ओका लरिका उमाकांत ई हमरा पोता बस अड्डा पे रोवे लाग.. ई रमाकांत से कहे लाग कि पापा हमरे स्कूल मा प्रोग्राम होत है तो सबके पापा आवत हैं.. तुम कभों नाही आत हौ.. तो रमाकांत इस से कहिन कि हम वादा करीत है कि अबकी तुम्हरे स्कूल केर प्रोग्राम मा जरूर अइबै.. रमाकांत पूछिन कि स्कूल केर प्रोग्राम मा का बनिहौ.. तो बोला सेना केर सबसे बड़ा अफसर बनब..