हमीरपुर जिले में सड़क दुर्घटना में छात्रा की मौत के बाद मुस्करा ब्लॉक के जल्ला गांव में बने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बीते एक सप्ताह से एक भी बच्चा स्कूल नहीं पहुंचा है। इससे यहां पहुंचने वाले शिक्षकों ने उच्च अधिकारियों की सूचना दी है।
मंगलवार को शिक्षकों ने अभिभावकों ने साथ बैठक कर बच्चों को स्कूल भेजने की अपील की है। वहीं अभिभावकों ने सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है। बता दें कि दो मई को हमीरपुर-राठ मार्ग स्टेट हाईवे 43 के किनारे बसे जल्ला गांव निवासी भीष्म कुशवाहा की पांच वर्षीय पुत्री प्रांजलि की स्कूल से घर लौट रही थी।
इस दौरान लोडर से कुचलकर मौत हो गई थी। घटना के बाद से सभी बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। मंगलवार को दोनों विद्यालयों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य भगवानदास और सभी शिक्षकों ने अभिभावकों की बैठक बुलाकर उनसे बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह किया।
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- फोटो : अमर उजाला
इस पर अभिभावकों ने इनकार कर दिया। प्रधानाचार्य ने बताया कि उच्चप्राथमिक विद्यालय में 38, प्राथमिक विद्यालय में 51 और आंगनबाड़ी केंद्र में 21 बच्चे हैं। अभिभावकों की मांग है कि रोड पर स्कूल की निकासी के मोड़ के दोनों तरफ गति अवरोधक व जेब्रालाइन बनवाई जाए।
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स्कूल के चपरासी को सख्ती से निर्देशित किया जाए, कि वह छुट्टी के समय बच्चों को रोड पार कराए। प्रधानाचार्य ने बताया कि मीटिंग के बारे में खंड शिक्षा अधिकारी मुस्करा को सूचित किया गया था और उन्हें आना भी था, लेकिन किसी कारण वश वह नहीं आए।
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वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कल्पना जायसवाल का कहना है कि उनको पूरे घटनाक्रम की जानकारी है। उन्होंने लोकनिर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता और आरटीओ से बात की है पत्र भी लिखा है। इसमें स्कूल के निकासी वाले मोड़ पर मुख्य मार्ग में दोनों ओर गति अवरोधक बनवाने और बोर्ड लगवाने का आग्रह किया गया है।
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गौरतलब हो कि बिवांर ग्राम पंचायत से संबद्ध मरा जल्ला की आबादी लगभग आठ सौ होगी। यहां हमीरपुर-राठ रो के पूर्वी किनारे पर प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय एक ही कैंपस में बने हुए हैं। वहीं, गांव की बस्ती रोड़ के पश्चिमी किनारे पर बसी हुई है। बच्चों को मेन रोड को पार करना पड़ता है।