कानपुर में नौबस्ता के मछरिया निवासी सुरेश मांझी के हाथ-पैर तोड़ और आंखों में केमिकल डालकर अंधा कर भीख मंगाने के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। दिल्ली के नागलोई निवासी राज नागर और उसकी मां आशा देवी को सरगना बनाया है। फरार एक अन्य युवती की तलाश में दबिश दी जा रही है।
करीब सात महीने पहले सुरेश मांझी को नौकरी का लालच देकर विजय अपने साथ ले गया था। कुछ दिन अपने घर रखा था। इसी दौरान उसे अंधा कर दिल्ली के भिखारी गैंग को बेच दिया था। एक महीने तक उससे भीख मंगवाते रहे। सुरेश की तबीयत बिगड़ी तो अक्तूबर के आखिरी सप्ताह में कानपुर छोड़कर फरार हो गए थे।
मामले में पुलिस ने 10 नवंबर को किदवईनगर के नटवनटोला निवासी राज नागर व उसकी मां आशा देवी को गिरफ्तार किया था। दोनों दिल्ली के नागलोई में रहकर भीख मंगवाने का काम करते थे। उधर, विजय ने दिसंबर के पहले सप्ताह में पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
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Human Trafficking Case
- फोटो : अमर उजाला
थाना प्रभारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। विजय और उसकी बहन तारावती मुख्य आरोपियों के इशारे पर ही सुरेश को उनके पास ले गया था। यहां उसको अंधा करके भीख मंगवाई गई।
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तारावती का अब तक नहीं लगा सुराग
पुलिस ने दावा किया था कि भिखारी गैंग में विजय की बहन तारावती भी शामिल है। उसने सुरेश मांझी के हाथ-पैर तोड़े थे। खुलासे के बाद से वह फरार है। डीसीपी ने उस पर 10 हजार का इनाम घोषित किया। पुलिस का कहना है कि तारावती की तलाश में दो टीमें लगाई गई हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
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बता दें कि नौबस्ता निवासी सुरेश मांझी को उसके परिचित मछरिया निवासी विजय ने नौकरी का झांसा देकर बंधक बना लिया था। हाथ-पैर तोड़े थे और आंखें फोड़ दी थी। उसके बाद राज नागर के हाथों उसको 25 हजार रुपये में बेच दिया था। दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर सुरेश से भीख मंगवाते थे।
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सुरेश ने बताया था कि मुझे दिल्ली से लाने के बाद जिन लोगों ने मुझे खरीदा था। उन लोगों ने मछरिया निवासी विजय से कहा कि मुझे इस लड़के के बदले दूसरा लड़का दो। हालत बिगड़ने पर मुझे वापस कानपुर सेंट्रल स्टेशन ले आए और दूसरी जगह बेचने की तैयारी करने लगे। इसके बाद मुझे किदवई नगर लेबर मंडी के पास लाकर छोड़ा।