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जन्मदिन विशेषः देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इस स्टोरी से हैं आप अनजान, यहां जानिए कुछ खास बातें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 01 Oct 2020 05:18 PM IST
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्मदिन है। उनके 75वें जन्मदिन पर आइए जानें उनके बारे में हम आपको उनके बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं। रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने पर उनके टीचर ने उन्हें सलाह दी थी। कानपुर देहात के परौंख गांव में जन्मे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर के डीसी लॉ कॉलेज में पढ़ चुके हैं। उनके अध्यापक सुमन निगम ने उन्हें एक सुझाव दिया था। निगम चाहते हैं कि उनके शिष्य सबसे पहले गौ रक्षा के नाम पर होने वाली कथित हत्याओं पर लगाम लगाएं।

 
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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साथ ही निगम का यह भी कहना है कि कोविंद को सरकार को वैसे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो। सुमन निगम ने कोविंद के राष्ट्रपति बनने पर कहा था कि सरकार के कई फैसले देश के लिए ठीक नहीं है। एक ताजा उदाहरण है जीएसटी। गरीब आदमी, जैसे सब्जी बेचने वाला भी इसके दायरे में आ गया है। कोविंद को सरकार को अच्छे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो। मुझे उम्मीद है कोविंद जाति, धर्म से ऊपर उठ कर वैसे कदम उठाएंगे जिससे हर आदमी सुखी होगा।

 
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पीएम मोदी के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई कानपुर से की है। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से बी. कॉम की डिग्री हासिल की। उसके बाद जुलाई, 1966 में उन्होंने डीसी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया। निगम कहते हैं कि उन दिनों लॉ की पढ़ाई दो साल की होती थी। मैं उस दौरान कोविंद का अध्यापक था। निगम 88 साल के हैं और कानपुर के सिविल लाइन्स मोहल्ले में रहते हैं। ज्यादा उम्र की वजह से बहुत ज्यादा लोगों से मिलते नहीं हैं। निगम के अनुसार कॉलेज में सैकड़ों छात्र थे। वे किसी को भी नहीं पहचानते थे।

 
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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लेकिन एक छोटी सी घटना की वजह से वो कोविंद को पहचानने लगे। निगम पुराने दिनों की बातें बताते-बताते उसी जमाने में खो गए। उन्होंने बताया कि एक बार स्कूल के रजिस्टर पर कोविंद की जगह गोविन्द चढ़ गया था और वह काफी दिनों तक रहा। फिर एक दिन ये बात सामने आई। भूल सुधार किया गया और रजिस्टर में गोविन्द को कोविंद किया गया। उसके बाद से कोविंद मेरी नजरों में आ गए।उनके अनुसार कोविंद लॉ कॉलेज में शुरू से ही दूसरे छात्रों से अलग थे और उनमे पढ़ाई के प्रति लगन बहुत ज्यादा थी।

 
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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निगम ने कहा मैं क्लास में लेक्चर दिया करता था। डिक्टेट नहीं करता था। कोविंद के अलावा कोई दूसरा छात्र उन नोट्स को अपनी कॉपी में लिखता नहीं था। कोविंद रोज कॉलेज आया करते थे। कॉलेज की लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन से महंगी किताबें देने के लिए मिन्नतें करते थे और फिर वह उन किताबों से नोट्स बनाया करते थे। लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद निगम और कोविंद के बीच संपर्क नहीं रहा। जब कोविंद बिहार के राज्यपाल बने तो निगम को ध्यान आया की वो उन्हीं के छात्र थे।
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