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बिकरू कांड: गैंगस्टर जय बाजपेई के तीनों भाइयों को हाईकोर्ट से जमानत, तीन माह से जेल में थे बंद
Sun, 20 Dec 2020 03:38 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 20 Dec 2020 03:38 PM IST
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विकास दुबे कांड: शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, जय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई के भाइयों अजय कांत, रजयकांत व शोभित बाजपेई को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। जमानतें दाखिल करने के बाद शोभित जेल से रिहा भी हो गया है, जबकि अजय व रजय अभी जेल में ही हैं।
विकास दुबे कांड: जय बाजपेई और पत्नी श्वेता
- फोटो : amar ujala
गैंगस्टर कोर्ट में चार सितंबर को तीनों भाइयों अजयकांत, रजयकांत व शोभित ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद कोर्ट ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। सेशन कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद तीनों ने हाईकोर्ट में जमानत की गुहार लगाई थी। शोभित को पहले जमानत मिल गई।
जय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
एक-एक लाख की दो जमानतें और इसी धनराशि का निजी मुचलका दाखिल करने पर उसे जेल से रिहा कर दिया गया। अजय व रजय की जमानत अर्जी भी हाईकोर्ट से मंजूर हो गई है लेकिन अभी उनकी जमानतें दाखिल नहीं हुई हैं। बिकरू कांड के बाद जय बाजपेई का नाम सामने आया था।
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विकास दुबे: जय की पत्नी श्वेता
- फोटो : amar ujala
जय की गिरफ्तारी के बाद तीनों भाइयों पर भी गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। नजीराबाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद तीनों भाई कई दिन तक फरार रहे। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट व कुर्की का नोटिस जारी किया था। पुलिस ने मुनादी के बाद मकान व दुकानों पर कुर्की की नोटिस भी चस्पा कर दी थी। इसके चलते तीनों भाइयों ने गैंगस्टर कोर्ट में समर्पण कर दिया था।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
महीने के आखिरी रविवार को थाने में लगानी होगी हाजिरी
शोभित को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल की कैद से आजादी तो मिल गई लेकिन हाईकोर्ट ने जमानत के साथ शर्त रखी है कि हर महीने के आखिरी रविवार को 10 से 12 बजे के बीच नजीराबाद थाने में हाजिरी लगानी होगी। समय के अंदर अगर शोभित हाजिर नहीं होता है तो एसओ इसकी शिकायत कोर्ट में कर सकता है और इस आधार पर शोभित की जमानत खारिज भी हो सकती है।
शोभित को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल की कैद से आजादी तो मिल गई लेकिन हाईकोर्ट ने जमानत के साथ शर्त रखी है कि हर महीने के आखिरी रविवार को 10 से 12 बजे के बीच नजीराबाद थाने में हाजिरी लगानी होगी। समय के अंदर अगर शोभित हाजिर नहीं होता है तो एसओ इसकी शिकायत कोर्ट में कर सकता है और इस आधार पर शोभित की जमानत खारिज भी हो सकती है।