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कन्नौज बस हादसे में सबसे बड़ा खुलासा, इस वजह से अंदर फंसकर जिंदा जले यात्री, बस में नहीं था...

Mon, 13 Jan 2020 09:43 AM IST
शाहरुख खान संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 13 Jan 2020 09:43 AM IST
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big revealing in Kannauj bus accident
बस और ट्रक में लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
कन्नौज के छिबरामऊ के घिलोई गांव के पास शुक्रवार रात आग का गोला बनी बस में न इमरजेंसी दरवाजा था और न खिड़की। बस हादसे की जांच में लगे विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के डिप्टी डायरेक्टर जी खान ने इसे ज्यादा लोगों की मौत कारण माना है। उनका कहना है, आग लगने से अधिकांश लोग बस के अंदर ही फंसकर रह गए। 
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kannauj road accident - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बस को मानकविहीन बताया। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हड्डियों का डीएनए टेस्ट भी शुरू हो गया है। उधर, बस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच डीएम रविंद्र कुमार ने एडीएम गजेंद्र कुमार सिंह को सौंपी है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के डिप्टी डायरेक्टर और मेडिकोलीगल एक्सपर्ट जी खान ने जोनल फील्ड यूनिट कानपुर जोन प्रभारी सुधीर द्विवेदी और जिला फील्ड यूनिट टीम प्रभारी रामेंद्र शंकर श्रीवास्तव के साथ बस के अंदर से कई नमूने एकत्र किए। 
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बस में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
डिप्टी डायरेक्टर खान बस में मिली हड्डियों और अवशेषों को लेकर लखनऊ चले गए। उन्होंने बताया कि डीएनए टेस्ट शुरू हो गया है, इसके बाद ही मृतकों की संख्या का पता चल सकेगा। 
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बस में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
इधर, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने हादसे की जांच एडीएम गजेंद्र कुमार सिंह को सौंप दी है, जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के आदेश भी दिए हैं। ताकि हादसे के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। मृतकों की संख्या का सही पता चल सके। विमल ट्रैवल्स एजेंसी के मालिक की भी तलाश तेज कर दी गई है। बताते हैं कि चंद वर्षो में अकूत संपत्ति के मालिक बन गए विमल के पास इस समय 45 बसे हैं। 
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आग बुझाते दमकल कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
उसके पिता फर्रुखाबाद एआरटीओ कार्यालय में सिपाही थे। तब दो बसें ही थीं। कहा जा रहा है कि राजनीतिक गलियारों व अफसरों से साठगांठ से विमल बसों का बेड़ा बढ़ाता चला गया। खास बात यह है कि डेढ़ साल पहले मैनपुरी हादसे के बाद विमल ट्रैवल्स एजेंसी को दागी मानकर उसकी बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद भी जिले में टूरिस्ट परमिट पर रोजाना सवारियां ढोई जा रही थीं।
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