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बसंत पंचमी: इस मुहूर्त में करेंगे पूजन ताे हाेंगी सभी मनाेकामनाएं पूरी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 22 Jan 2018 09:17 AM IST
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सरस्वती पूजन
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बसंत ऋतु का आगमन नई फसल के उगने और फूलों के खिलने का त्योहार है। यह त्योहार माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती का पूजा अर्चन किया जाता है। पुरानी मान्यता है कि आज से बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई जाती है ताकि पूरे जीवन उन पर मां सरस्वती की कृपा बनी रहे।
बसंत पंचमी को ज्ञान व बुद्धि की देवी मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रुप में मनाते है
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी को ज्ञान व बुद्धि की देवी मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रुप में मनाते है। इसलिए आज के दिन इनकी पूजा विशेष फलदायी होती है। इस दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा कर विद्या, बुद्धि, कला व ज्ञान का वरदान प्राप्त किया जा सकता है।
बसंत है ऋतुओं का राजा
बसंत पंचमी का उत्साह
बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। क्योंकि बसंत ऋतु में न तो सर्दी अधिक होती है न चिलचिलाती धूप इतना ही नहीं बारिश का झंझट भी नहीं रहता। इस ऋतु में चारों ओर हरियाली व सरसों के फूलों से भरे पीले खेत ही नजर आते हैं। साथ ही जौ और गेहूं की बालियां व आम के पेड़ों पर बौर आ जाते है। पेड़ पौधों पर नए फल फूल भी इसी मौसम में आते है। चारों ओर रंग विरंगी तितलियां भी मंडराने लगती है।
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सुबह 7:15 से 12:15 तक है पूजन का मुहूर्त
बंसत पर उल्लास
किसी भी दिन पूजन करना हो तो शुभ मुहूर्त में ही करें। क्योंकि शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना का विशेष फल प्राप्त होता है। सोमवार को भी मां सरस्वती के पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 से दोपहर 12:15 तक है। इस दौरान की गई पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति हो सकती है।
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ऐसे करें मां सरस्वती को प्रसन्न
बसंत का अागमन
यदि किसी तीर्थ में स्नान कर सकें तो सबसे उत्तम है। नहीं तो घर पर पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर पीले या सफेद कपड़े पहनें। इसके बाद मां सरस्वती के चित्र पर सफेद या पीले चंदन से तिलक करें। इसके बाद मां को सफेद या पीले फूल भेेंट करें। इसके बाद स्फटिक, मोती या तुलसी की माला से मां सरस्वती के किसी भी मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें। इसके बाद आरती कर मां को दूध, दही, तुलसी व शहद मिलाकर पंचामृत का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें।