बांदा जिले में कम नंबर आने पर ट्रेन से कटकर खुदकुशी करने वाला हेमंत मां का लाडला था। प्रत्येक मंगलवार को संकट मोचन मंदिर में बजरंगबली के दर्शन करना उसकी आदत में शुमार था। घटना वाले दिन भी उसने संकट मोचन मंदिर में दो घंटे गुजारे थे।
Banda Suicide: मरने से पहले हेमंत पहुंचा था हनुमान मंदिर, हाथ में लिखा था नंबर, मां बोली- नहीं थी कोई बात
मां का लाडला था हेमंत
हेमंत मां कविता का लाडला था। मां के हाथ से खाना खाता था। यहां तक कि मां उसे नहलाती भी थी। घटना वाले दिन मां ने 50 रुपये संकट मोचन मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए दिए थे। उधर, सरस्वती प्रकाश मंदिर स्कूल के अध्यापक जर्नादन प्रसाद तिवारी ने बताया कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि हेमंत ऐसा कर सकता है।
मां बोली- ऐसी कोई बात नहीं थी
हेमंत शुरू से ही वह पढ़ने में होशियार था। कहीं कोई ऐसी बात नहीं थी, जिससे वह इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लेता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्रेन से कटकर खुदकुशी की पुष्टि की गई है। जीआरपी एसआई जयकरन ने बताया कि पिता ने हेमंत का पोस्टमार्टम कराने के लिए लिख कर दिया था।
हाथ में लिखा था मोबाइल नंबर
पिता अजय यादव ने बताया कि घटना वाले दिन उसे पुलिस से जानकारी हुई कि उसके हाथ में मोबाइल नंबर लिखा था। इस नंबर पर कई बार कॉल कर चुके हैं, लेकिन नंबर बंद बता रहा है। नंबर किसका है, यह पता चल जाए तो यह राज खुल सकता है कि इतना बड़ा आत्मघाती कदम उसने क्यों उठाया।
गोदाम की रखवाली और दूध के पैसे से चलता है घर
मृतक छात्र हेमंत के पिता अजय यादव ने बताया कि वह मूलत: देहात कोतवाली क्षेत्र के जारी गांव के रहने वाले हैं। तकरीबन 20 वर्ष से वह बंगालीपुरा, सुतरखाना मोहल्ले में मकान बनाकर रह रहे हैं। वह प्राइवेट में मंडी समिति स्थित गेहूं गोदाम की रखवाली भी करते हैं। घर में दो भैसों से दूध का व्यापार भी होता है। उनके दो ही पुत्र थे।