यौन शोषण मामले में तीन से 17 साल तक के नाबालिगों ने न्यायालय में दुष्ट अंकल रामभवन व अंटी दुर्गावती की घिनौनी करतूत को उजागर किया था। सीबीआई ने पाक्सो कोर्ट में 69 बच्चों के बयान कराए थे। जिनके बयानों ने दोनों को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया। नाबालिगों ने भले ही 10 साल तक घर में मुंह नहीं खोला लेकिन अदालत में बेबाकी से अपने साथ हुए कुकृत्य बयां किया।
अलग-अलग बयान में बताया कि रामभवन अंकल अपने घर लेकर आए थे अंकल ने पहले अश्लील वीडियो और खिलौने दिखाते थे फिर गलत काम करते थे। दर्द से जब वह चीखते तो उन्हें वीडियो गेम में उलझाकर शांत करा दिया जाता था। अंटी सब कुछ देखती रहती थीं। वह खुद उन्हें शांत कराती थी। घर में बताने से मना किया जाता था।
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सीबीआई के दरोगा पुरुषोत्तम कुमार व सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह, दोषी दुर्गावती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक बौने बच्चे ने कोर्ट को इशारों में बताया कि उसके साथ जब कुकर्त्य हुआ तो तेज बुखार आ गया। घर में इशारे से बताया तो परिवार के लोग समझ नहीं पाए। इसी प्रकार दो सगे नाबालिग भाइयों ने बताया कि उसके साथ कई तरह की अमानवीय हरकतें की गईं।
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सीबीआई के दरोगा पुरुषोत्तम कुमार व सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन नाबालिग बच्चों ने बताया कि अंकल इस सब का वीडियो बनाते थे। दूध वाले के नाबालिग बेटे ने बताया कि अंकल ने पापा से कहा बच्चे को यहां छोड़ जाओ मैं इसे कंप्यूटर सिखा दूंगा। उसके बाद एक साल कुकृत्य किया। पापा से कम मिलने देते थे। अगर वह चला जाता था तो पापा से बुलवा लेते थे।
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सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट से मुंह बांधकर निकाला रामभवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'जैसा मैं कहूं करो नहीं तो वीडियो गेम नहीं खेलने दूंगा'
नौकरानी के बेटे ने बताया कि अंकल कहते थे जैसा मैं कहूं करो नहीं तो वीडियो गेम नहीं खेलने दूंगा। रुपये भी नहीं दूंगा। रामभवन चाहे दूध वाला हो या किराने वाला या नौकरानी जिसे भी जानता था उसके बच्चे को किसी न किसी बहाने से बुलाकर उसे वीडियो गेम, रुपये आदि का लालच देकर जाल में फंसा लेता था।
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फैसले के बाद दोषी दुर्गावती को न्यायलय से ले जातीं महिला पुलिसकर्मी
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इनकी गवाही ने पहुंचाया फांसी के फंदे तक
रामभवन के यौन शोषण के मामले में बच्चों के अतिरिक्त सीबीआई ने साक्षी के तौर 74 अन्य लोगों को अदालत में पेश किया था। जिसमें 22 शिक्षक, एक ग्राम पंचायत अधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिकारी, डॉक्टर आदि शामिल हैं। इनकी गवाही ने भी रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का काम किया।