उत्तर प्रदेश के कानपुर में बी-फार्मा छात्र संगम यादव की मौत के मामले में पुलिस ने बुधवार को उसके आठ दोस्तों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। पुलिस ने हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोप में कार्रवाई की है। हालांकि, पुलिस को हत्या का साक्ष्य नहीं मिला है। लाश को फेंकने (साक्ष्य मिटाने) में इन आरोपियों पर शिकंजा कसना तय है।
विवेचना के दौरान पुलिस धाराओं में बदलाव कर सकती है। मूलरूप से कन्नौज के छिबरामऊ निवासी संगम यादव शहर के निजी कॉलेज से बी-फार्मा की पढ़ाई कर रहे थे। वह अकेले अपने मकान में रहते थे। एक जनवरी की सुबह बिठूर इलाके में सड़क किनारे संगम का शव पड़ा मिला था। परिजनों ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
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संगम यादव हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने जब तहकीकात की तब पता चला कि 31 दिसंबर की रात संगम यादव ने अपने आठ दोस्तों के साथ अभिषेक पांडेय के बिठूर स्थित हॉस्टल पर पार्टी की थी। सभी ने शराब पी थी। संगम मकान के पीछे की तरफ झुककर उल्टियां करने लगा तो नीचे गिर गया था।
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संगम यादव हत्याकांड
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दोस्तों ने जब देखा कि वह मर गया है तो उसका शव सड़क किनारे फेंक दिया था। चूंकि परिजन लगातार दावा कर रहे हैं कि ये हत्या है। इसलिए पुलिस ने हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोपों में सभी को जेल भेजा है।
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हत्या का नहीं मिला साक्ष्य
एसीपी कल्याणपुर दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि जिन आठ आरोपियों को जेल भेजा गया है उसमें अभिषेक पांडेय, मंगेश भारती, अफजल अली, गौतम कुमार, आनंद वर्मा, दीपक कुशवाहा, कैफ अली व अभिषेक सरोज शामिल हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इनके खिलाफ हत्या के साक्ष्य नहीं मिले हैं। फोरेंसिक आदि रिपोर्ट को कोर्ट में पेश की जाएगी। आरोपियों के खिलाफ घटनास्थल से शव उठाकर ठिकाने लगाने के सुबूत हैं। भविष्य में इसी में वे फंसेंगे।