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अटेंशन! असली वर्दी और नकली पुलिस, दो हजार में बन जाओ इंस्पेक्टर

Wed, 07 Mar 2018 03:03 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 07 Mar 2018 03:03 PM IST
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attention! Real Uniforms and Fake Police
हाल में बढ़े फर्जी पुलिसकर्मी बन ठगने के मामले

‘फिटकरी और मिश्री एक जैसी ही नजर आती है ’ यह कहावत आपको सचेत करने के लिए काफी है। क्योंकि वर्दी वाले ठग खुलेआम घूम रहे हैं। अगर कोई पुलिसवाला रास्ते में मिले और आपके जेवर सुरक्षित रखने का हवाला दे तो उसके अपनेपन पर यूं ही फिदा न हों। उसकी वर्दी, टोपी, कंधे पर चमचमाते बिल्ले सब दिखावटी हैं। आप ठगों के जाल में फंस सकते हैं। कानपुर शहर में ठगी का धंधा अब मंदा नहीं रहा, मात्र दो हजार में सिपाही से इंस्पेक्टर तक की वर्दी तैयार की जा सकती है। 80 रुपये में स्टार लगाकर दरोगागीरी भी खूब हो रही है। वर्दी वाले ठगों की पहचान करना भी मुश्किल है तभी तो असली भी नकली के झांसे में आ जाते हैं। पिछले तीन माह में शहर में चार ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें नकली पुलिसकर्मी बन ठगों ने आम लोगों से टप्पेबाजी कर ली। एक मामले में पुलिस भी चकमा खा गई। 


 

attention! Real Uniforms and Fake Police
दो हजार में तैयार हो जाती है पुलिस की वर्दी, पुलिस भी वारदातों से हैरान
दो हजार में बन जाओ इंस्पेक्टर
परेड, मेस्टन रोड, मूलगंज में ऐसी कई दुकानें हैं जो पुलिस की वर्दी से लेकर स्टार, बेल्ट और टोपी तक बेंचती हैं। दुकानदार वर्दी बनाने से पहले न ही पहचान पत्र लेते हैं न ही पुलिस का नियुक्ति पत्र। वह यह सब करने को बाध्य भी नहीं हैं क्योंकि ऐसा कोई कानून ही नहीं है, जो इन्हें वर्दी बेचने से रोके। 

खाकी वर्दी-1200 रुपये
पी-कैप-250
गोल कैप-100
स्टार-80 रुपये में दो जेाड़ी
पुलिस का बैच-300 रुपये
सीटी डोरी-30 रुपये
बेल्ट-100 से 150 रुपये
 
attention! Real Uniforms and Fake Police
दो हजार में तैयार हो जाती है पुलिस की वर्दी, पुलिस भी वारदातों से हैरान
पहली घटना
29 जनवरी 2018 गोविंद नगर में हाउस टैक्स जमा करने जा रहीं रतनलाल नगर निवासी बैंक कर्मी दीपक अग्रवाल की मां उर्मिला देवी को फर्जी पुलिस वालों ने झांसा देकर 70 हजार की टप्पेबाजी कर ली थी। दो वर्दीधारी उनके पास आए और कहा कि रोज लूट हो रही हैं। इसके बावजूद वह सोने के कंगन पहनकर घूम रही हैं। तभी सिपाही बने ठग ने कागज निकाला और उर्मिला के कंगन उतरवाकर उसमें रखवा दिए। जब घर पहुंचकर उर्मिला ने कागज खोला तो उसमें पत्थर थे।
 
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हाल में बढ़े फर्जी पुलिसकर्मी बन ठगने के मामले
दूसरी घटना
31 जनवरी 2018 को अफीमकोठी निवासी सेल्स एक्जीक्यूटिव रतनीश जायसवाल टीपी नगर के होटल में चाय पी रहे थे, तभी वहां पहुंचे किशोर ने उनकी जैकेट खराब कर दी। वह बैग को स्कूटी में रख जैकेट साफ करने लगे, तभी किशोर बैग लेकर भागने लगा। भीड़ ने उसे दबोच कर टीपी नगर चौकी इंचार्ज के हवाले कर दिया। चौकी इंचार्ज किशोर को ले जा ही रहे थे कि तभी वहां पहुंची सफेद इनोवा से पहुंचे वर्दीधारी इंस्पेक्टर ने चौकी प्रभारी पर किशोर को छोड़ने का दबाव बनाया। चौकी इंचार्ज ने उसे छोड़ने से इनकार कर दिया तो फर्जी इंस्पेक्टर पीड़ित रतनीश को इनोवा में बैठाकर ले गया। चौकी इंचार्ज भी वर्दी देख ठिठक गया। कुछ दूर जाने के बाद इंस्पेक्टर ने उन्हें छोड़ दिया। बाद में पुलिस ने फर्जी इंस्पेक्टर को शुक्लागंज से धर दबोचा। वह आगरा का रहने वाला अजय सिंह निकला। उसके पास से इंस्पेक्टर और दरोगा की वर्दी, वायरलेस सेट, नेम प्लेट और पुलिस आईकार्ड, टोपी और नकली पिस्टल बरामद हुई।
 
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हाल में बढ़े फर्जी पुलिसकर्मी बन ठगने के मामले
तीसरी घटना
16 फरवरी 2018 को पुलिस की वर्दी पहने शातिरों ने चेकिंग के नाम पर सीसामऊ थाने से चंद कदम दूर सेल्स मैनेजर ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव के साढ़े पांच हजार रुपये पार कर दिए। गोरखपुर निवासी ज्ञान प्रकाश उस दिन काकादेव में पढ़ रहे बेटे सौरभ से मिलकर वापस जा रहे थे। जरीब चौकी के पास वह टेंपो से उतरे, तभी वर्दी पहने दो लोग आए और बोले, दरोगा जी बुला रहे हैं। ज्ञान उनके साथ बाइक पर बैठ गए। रास्ते में चेकिंग के नाम पर उनके रुपये पार कर दिए।
 
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