‘विकास’ चिड़ियाघर के बेजुबानों को पागल बनाता जा रहा है। केडीए की आवासीय योजना सिग्नेचर सिटी कानपुर चिड़ियाघर के जानवरों के लिए जानलेवा बन गई है। यहां चल रहे निर्माण कार्यों ने टाइगर, लैपर्ड कैट, बंदरों में बेचैनी बढ़ा दी है तो किसी भी पक्षी ने तीन महीने से ब्रीडिंग नहीं की है। दिन रात काम की तेज आवाजें जानवरों को पागल बनाने के मुहाने पर पहुंचा चुकी हैं।
जानवरों ने खाना छोड़ा
कानपुर जू के कई जानवरों ने तो खाना छोड़ दिया है। डस्ट पार्टिकल (धूल) पक्षियों का श्वसन तंत्र ध्वस्त कर रहा है। खट-पट की आवाज से परेशान बाघ ने अपने कान जख्मी कर लिए हैं। रात में तेज उजाला होने से जानवर सो नहीं पा रहे हैं। जू की दीवार से सटे इस प्रोजेक्ट की वजह से जानवरों को हो रही परेशानियों को रोकने के लिए जू निदेशक ने कमिश्नर और केडीए उपाध्यक्ष से शिकायत की है।
दीवार से सटा है बाघ का बाड़ा
जू निदेशक दीपक कुमार के अनुसार निर्माणाधीन फ्लैटों में हो रहे शोरगुल, तेज आवाज से बाघ बेचान हैं। सिग्नेचर सिटी की दीवार से सटे बाड़े में बाघ अभय दिन भर घूमता रहता है। आवाज से परेशान होकर वह जालियों में अपना कान और सिर रगड़ता रहता है। इस कारण उसके कान में घाव हो गया है।
लेपर्ड कैट, लंगूर और बंदर भी परेशान
दूसरे बाड़ों के लेपर्ड कैट, लंगूर और बंदर भी परेशान हैं। रात में यहां लगी हैवी लाइटों से बाड़ों में रोशनी आती है, जिससे जानवर सो नहीं पा रहे हैं। जो इनके बायोलॉजिकल सिस्टम बिगाड़ रही है। जू में इन्हीं वजहों से रोड लाइट नहीं लगाई गई हैं।
इन पक्षियों की ब्रीडिंग रुकी
निर्माण सामग्री के कारण उड़ रही धूल (डस्ट पार्टिकल) पक्षियों का श्वसन तंत्र बिगाड़ रही है। जू में रेड जंगल फाउल, जंगल कैट, गोल्डन फ्रीजेंट, चील की ब्रीडिंग रुक गई है। तीन महीने से कोई चूजा नहीं पैदा हुआ है। कई पक्षियों की मौत भी हो चुकी है। इस कारण जू प्रशासन भी परेशान है।