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जंगली जानवरों की मौत में माफियाओं का हाथ, तस्करी के लिए आएदिन हो रहे दुर्लभ जानवरों के शिकार

Sun, 23 Jun 2019 07:44 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 23 Jun 2019 07:44 PM IST
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animal s death in ranipur wild wildlife sanctuary
रानीपुर वन्यजीव क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट के रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र व आसपास के क्षेत्र में रहने वाले जंगली जानवर जिसमें बाघ, हिरन सहित भालूओं की मौत को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि इस कार्य में जंगल की कीमती लकड़ी काटने वाले बड़े माफियाओं का भी हाथ हो सकता है।


 
animal s death in ranipur wild wildlife sanctuary
रानीपुर वन्यजीव क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
कई जंगली जानवरों के मारे जाने के बाद भी जांच के नाम पर मात्र खानापूर्ति ही की गई। जंगली जानवरों के सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है। 22 जून को मानिकपुर क्षेत्र के मुंबई हावड़ा रेल रूट पर रानीपुर वन्य जीव विहार के मारकुंडी रेंज क्षेत्र में इटवा कुसुमी के बीच पैसेंजर ट्रेन से कट जाने से भालू की मौत हो गई।

 
animal s death in ranipur wild wildlife sanctuary
रानीपुर वन्यजीव क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
कहा जा रहा है कि भालू को जंगल से वन माफियाओं ने खदेड़ा था। जिसके कारण वह रेल रूट पर आने से उसकी मौत हो गई। रानीपुर वन्य जीव विहार में शेर, जीता, भालू, सांभर, हिरन, लकड़ बघ्घा, सहित कई जंगली जानवर रहते है। एक साल के अंदर तीन चीता को शिकारियों ने मौत के घाट शिकारियों ने उतार दिया है।

 
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रानीपुर वन्यजीव क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा कई जंगली जानवर मारे गए। ट्रेन से कटे भालू की मौत पर भी सवाल उठाने लगे हैं। सूत्र बताते है कि जंगल की लकड़ी कटवाने वाले वन माफिया जंगल में खतरनाक जानवरों को रहने नहीं देना चाहते उनका मानना है कि इनके कारण जंगल की लकड़ी काटने में समस्या आती है।

 
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रानीपुर वन्यजीव क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
जो शिकारियों से मिलकर जंगली जानवरों को मौत के घाट उतार रहे हैं।  प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश का कहना कि कि यह सब अफवाहे फैलाई जा रही है। जंगल में कोई लकड़ी नहीं काटी जाती। वन विभाग के अधिकारी जंगल मेें सर्चिंग अभियान चलाते रहते हैं।

 
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