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38 साल पहले बैंडिट क्वीन ने 20 ठाकुरों को उतारा था मौत के घाट, आई फैसले की घड़ी

Fri, 20 Dec 2019 02:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 20 Dec 2019 02:06 PM IST
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after 38 years verdict will come on behmai kand, hearing is over
फूलन देवी
देशभर में चर्चित रहे कानपुर देहात के बेहमई कांड की सुनवाई 38 साल बाद पूरी हो गई है। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। छह जनवरी को कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। 38 साल पहले बेहमई गांव में दस्यु सुंदरी फूलन देवी और गिरोह ने कतार में खड़ा कर 20 लोगों की गोली मारकर सामूहिक हत्या कर दी थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान फूलन समेत 15 आरोपियों की मौत हो चुकी है।


 
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phoolan devi - फोटो : social media
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि 14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी के गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोला था। इसके बाद जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह समेत 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

 
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
जंटर सिंह समेत आधा दर्जन ग्रामीण गोली लगने से घायल हुए थे। राजाराम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद यह कांड देशभर की सुर्खियों में रहा था। वर्ष 2012 में डकैत फूलन, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्यामबाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित की अदालत में चल रही है।
 
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बेहमई कांड फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
हत्याकांड के बाद से लगातार तारीख पर तारीख पड़ती रही। इसी तरह 38 साल बीत गए। राज्य की ओर से अभियोजन पक्ष ने वर्ष 2014 में गवाही पूरी कर ली थी। इसके बाद से अभियुक्तों की ओर से बचाव पक्ष ने बहस शुरू की। डीजीसी ने बताया कि गुरुवार को बचाव पक्ष की बहस पूरी हो गई है। फैसला सुनाने के लिए विशेष अदालत ने छह जनवरी की तारीख मुकर्रर की है। डीजीसी ने बताया कि बेहमई हत्याकांड में आरोपी भीखा, श्यामबाबू व विश्वनाथ उर्फ पूतानी जमानत पर हैं। आरोपी पोसा अभी भी जेल में बंद है। 
 
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
डीजीसी के मुताबिक मामले में नामजद डकैत विश्वनाथ उर्फ अशोक और रामकेश फरार चल रहे हैं। पुलिस अभी तक उन्हें तलाश नहीं पाई है। गवाही के दौरान अभियोजन के पत्र पर मान सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। तब से वह भी फरार चल रहा है। डीजीसी ने बताया कि बेहमई हत्याकांड मेें 38 सालों के दौरान 24 अगस्त 2014 को आरोप तय हो सके। 21 सितंबर 2012 को पहली बार गवाही शुरू हुई। पहले वर्ष में 12 लोगों की गवाही हुई।

 
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