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बेहमई कांड के 39 साल: मरते गए गवाह नहीं मिला न्याय, फूलन ने 20 लोगों को लाइन में खड़ा कर मारी थी गोली

Tue, 15 Dec 2020 04:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर देहात
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर देहात Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 15 Dec 2020 04:43 PM IST
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39 years of Behmai Kand: Died anointed, witness, justice not found, Phoolan Devi kill 20 people stand in a row
विजय नारायण सिंह सेंगर व फूलन देवी की फाइल फोटो
वादी के निधन के बाद एक बार फिर से चर्चित बेहमई कांड ताजा हो गया है। 39 साल दस माह बाद भी कानूनी दांव-पेच में फंसे बेहमई के 20 परिवारों को न्याय नहीं मिल सका है। वादी के निधन के बाद इस केस से जुड़े लोगों का कहना है कि अब पैरवी में कमी आने से मुकदमा और लटकेगा। वहीं अभियोजन का मानना है कि वादी के बयान पहले ही हो चुके थे। वैसे भी मुकदमा राज्य सरकार लड़ रही है।


 
39 years of Behmai Kand: Died anointed, witness, justice not found, Phoolan Devi kill 20 people stand in a row
फूलन देवी
इसलिए मुकदमे की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अभियुक्तों के अधिवक्ता का कहना है कि मुकदमा बहस स्तर पर है। वह वादी को बहस के लिए फिर से तलब कराना चाहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। 14 फरवरी 1981 को कानपुर देहात के गांव बेहमई में शाम पांच बजे डकैतों ने एक लाइन में लोगों को खड़ा कर गोलियां बरसाईं थीं। इसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी। छह लोग घायल हुए थे।

 
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फूलन देवी एवं मां मूला देवी - फोटो : अमर उजाला
तब से यह मुकदमा कोर्ट में विचाराधाीन है। डकैत फूलनदेवी समेत ज्यादातर डकैतों की मौत सुनवाई के दौरान ही हो चुकी थी। चार आरोपी अभी भी फरार हैं। कानूनी दांव-पेच की बात करें तो इस मुकदमें में 31 साल बाद आरोप तय हो चुके हैं। 32 साल में गवाही पूरी हो सकी थी। जनवरी 2020 में मुकदमे के फैसले का समय आया तो अभियुक्तों के अधिवक्ता ने मूल केस डायरी न होने की बात अदालत के सामने रखी।

 
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फूलन देवी अपने गिरोह के साथ - फोटो : अमर उजाला
इस पर फिर से मुकदमे में तारीखें मिल रही हैं। वादी 85 वर्षीय राजाराम का निधन रविवार को होने के बाद एक बार फिर इस मुकदमे को लेकर लोगों में तरह-तरह की बातें होने लगी हैं। बहस स्तर पर चल रहे इस मुकदमे में अब 24 दिसंबर को सुनवाई होनी है। मुकदमे में चार अभियुक्त पोसा, विश्वनाथ, भीखा, श्यामबाबू ही बचे हैं। पोसा जेल में और बाकी तीनों अभियुक्त जमानत पर हैं।

 
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
1981 में मुकदमा दर्ज कराया, 2012 में दी गवाही
वादी राजाराम पुत्र लाखन ने फरवरी 1981 में बेहमई नरसंहार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें 14 फरवरी 1981 में गांव में फूलनदेवी समेत अन्य डकैतों के नरसंहार की बात कही गई थी। कानूनी दांव-पेच का यह हाल रहा कि 32 साल बाद वादी के बयान 24 दिसंबर 2012 को दर्ज किए गए थे।

 
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