मनोविज्ञान का पीरियड था। उस वक्त क्लास में हुकुमेंद्र और मंथन के साथ चार छात्र और दो छात्राएं थीं। सभी ने पूरा पीरियड अटेंड किया। लेकिन जैसी ही शिक्षिका क्लास रूम से बाहर निकलीं अचानक माहौल बदल गया। क्लासरूम में दूसरी पंक्ति में बैठा मंथन अचानक हमलावर हो गया और आगे बैठे हुकुमेंद्र की गर्दन पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी। गोली लगते ही क्लासरूम में भगदड़ मच गई। चीख पुकार शुरू हो गई लेकिन मंथन वहां खड़ा मुस्कुराता रहा। मूंछों को ताव दे रहा था। इस घटना को करीब से देखने वाले छात्रों का कहना है कि उसने वहां से न तो भागने की कोशिश की न ही वह डरा हुआ लगा। बड़ी तसल्ली के साथ पिस्टल हाथ में लेकर कैंपस से बाहर चला गया।
झांसी हत्याकांडः हुकुमेंद्र को गोली मारकर मूंछों पर ताव दिया, चश्मा लगाया और हंसते हुए क्लासरूम से निकला था मंथन
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मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले में रेलवे स्टेशन क्षेत्र निवासी मंथन सिंह सेंगर बुंदेलखंड महाविद्यालय में एमए फाइनल का स्टूडेंट है। अगर कालेज प्रशासन की मानें तो मंथन क्लास बहुत कम ही अटेंड करता था। वह अपना एक गुट बनाकर कालेज कैंपस में घूमता रहता था। मथुरा के शेरगढ़ में जटवारी गांव निवासी हुकुमेंद्र सिंह भी उसी के साथ पढ़ता था। कहा तो यहां तक जाता है कि इन दोनों में पहले अच्छी खासी दोस्ती रही है। इनकी क्लास में पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि यह दोनों पहले साथ साथ ही रहते थे लेकिन अचानक ही मनमुटाव हो गया था। बोलचाल तक बंद थी। मंथन ने तो क्लास में जाना ही बंद कर दिया था। दोनों ही छात्रों के बीच अपने को एक दूसरे से ताकतवर साबित करने में लगे रहते थे। इसे लेकर कई दफा नोकझोंक तक हो चुकी थी।
शुक्रवार को जब मंथन क्लासरूम में दाखिल हुआ तो उसका अंदाज उस वक्त भी बदला हुआ था। बड़े स्टाइल के साथ चश्मा लगाते हुए आया। क्लास रूम में जब बैठा तो चश्मा उतारकर शर्ट पर टांग लिया था। उस वक्त भी उसने हुकुमेंद्र सिंह की तरफ कई दफा घूरकर देखा था। लेकिन कौन जानता था कि यह इतना बड़ा गोलीकांड कर देगा। जब मंथन ने हुकुमेंद्र को गोली मारी थी तब आसपास मौजूद छात्र तो भाग रहे थे लेकिन वह धीरे-धीरे चलते हुए जा रहा था। हाथ में पिस्टल था लिहाजा उसे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं थी। जाते हुए उसने कई दफा पीछे मुड़कर भी देखा। एक बार को रुक भी गया था। लेकिन फिर कैंपस में मौजूद लोगों की तरफ पिस्टल लहराया और चला गया।
गोली निकाली, दो घंटे चला पोस्टमार्टम
गोली लगने से घायल छात्रा कृतिका का दो घंटे पोस्टमार्टम चला। सिर के हिस्से में गोली न मिलने पर पोस्टमार्टम रोककर एक्स-रे कराया था। एक्स-रे में गोली नजर आने के बाद पुन: पोस्टमार्टम हुआ। दो घंटे के पोस्टमार्टम के बाद गोली निकाली गई।
रातभर जागता रहा मंथन, व्हाट्सएप पर बदलता रहा स्टेट्स
घटना को अंजाम देने से पहले मंथन गुरुवार की रात को सो नहीं सका। रात को करीब दो बजे उसने आखिरी बार व्हाट्सएप पर अपना स्टेटस बदला है। इससे माना जा रहा है कि वह रात भर गोलीकांड की प्लानिंग करता रहा। शुक्रवार को कालेज पहुंचा और घटना को अंजाम दे दिया।
शुक्रवार को जब उसने हुकुमेंद्र को गोली मारी तो यह बात कालेज में तेजी से फैल गई। इसके बाद सभी ने सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच शुरू की। देखा गया कि घटना के ठीक एक दिन पहले रात दो बजे तक मंथन अपने व्हाट्सएप पर स्टेटस बदलता रहा। हालांकि, इस दौरान भी उसने कोई ऐसा स्टेटस नहीं डाला, जिससे लगे कि वो इस तरह की बड़ी वारदात को अंजाम देने का मन बना चुका है। इससे यह संकेत जरूर मिले हैं कि मंथन रात में ही यह मन बना चुका था कि वह अगली सुबह हुकमेंद्र और कृतिका की जान ले लेगा। इसके लिए वह रात भर नहीं सोया।