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विमान हादसा: शहीद हुए जालौन के लाल का गार्ड ऑफ आनर के साथ किया गया अंतिम संस्कार, हर आंख हुई नम
Fri, 19 Mar 2021 06:49 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 19 Mar 2021 06:49 PM IST
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गार्ड ऑफ आनर के साथ किया गया अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
मिग-21 विमान हादसे में जान गंवाने वाले शहीद ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता का पूरे सम्मान के साथ ग्वालियर में ही अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एयरफोर्स के तमाम अधिकारी भी मौजूद रहे। ताबूत में रखे शहीद आशीष के शव को गार्ड ऑफ आनर दिया गया।
गार्ड ऑफ आनर के साथ किया गया अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
इसके बाद कैप्टन के चचेरे भाई अमित ने मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद भीड़ में हर किसी की आंखें नम थी और दिलों में कैप्टन की शहादत के प्रति सम्मान था। बता दें कि बुधवार को ग्वालियर एयरबेस पर मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो गया था। घटना में जनपद के निवासी कैप्टन आशीष की शहादत हो गई थी।
गार्ड ऑफ आनर के साथ किया गया अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
गुरुवार को ग्वालियर में ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले एयरबेस पर उनका सम्मान करने वाले अधिकारियों की भीड़ लगी रही। एयरफोर्स के जवान से लेकर हर एक अधिकारी की आंख नम थी। सम्मान के बाद गार्ड आफ आनर दिया गया। जनपद से भी सैकड़ों लोग जिनमें रिश्तेदार, साथी और कैप्टन को जानने वाले ग्वालियर पहुंचे।
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गार्ड ऑफ आनर के साथ किया गया अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
हादसे से पहले की थी पत्नी से बात
कैप्टन के करीबियों ने बताया कि विमान पर बैठने से पहले कैप्टन आशीष ने फोन पर अपनी पत्नी छाया से आखिरी मर्तबा बात की थी। किसी को क्या पता था कि अब उनकी आवाज आसमान में ही इस तरह हमेशा के लिए गुम हो जाएगी।
कैप्टन के करीबियों ने बताया कि विमान पर बैठने से पहले कैप्टन आशीष ने फोन पर अपनी पत्नी छाया से आखिरी मर्तबा बात की थी। किसी को क्या पता था कि अब उनकी आवाज आसमान में ही इस तरह हमेशा के लिए गुम हो जाएगी।
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कैप्टन आशीष की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बोले पिता, दुख के साथ गर्व भी
फैजाबाद से ग्वालियर पहुंचे पिता प्रकाश चंद्र को पूरे रास्ते भर नहीं बताया गया था कि बेटे की शहादत हो गई है। ग्वालियर पहुंचकर जानकारी हुई तो वे बेसुध हो गए। बोले कि हर बेटा अपने पिता का सहारा होता है। बेटे के गम के साथ उसकी शहादत पर फर्क भी है।
फैजाबाद से ग्वालियर पहुंचे पिता प्रकाश चंद्र को पूरे रास्ते भर नहीं बताया गया था कि बेटे की शहादत हो गई है। ग्वालियर पहुंचकर जानकारी हुई तो वे बेसुध हो गए। बोले कि हर बेटा अपने पिता का सहारा होता है। बेटे के गम के साथ उसकी शहादत पर फर्क भी है।