धौलाना औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस चौकी से मात्र 250 मीटर और सीएनजी पंप से 500 मीटर की दूरी पर अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्टरी में शनिवार दोपहर ढाई बजे भीषण विस्फोट हो गया। हादसे में 13 मजदूरों की मौत हो गई और 11 बुरी तरह झुलस गए। इनमें पांच की हालत बहुत गंभीर है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने के लाइसेंस पर चलाई जा रही फैक्टरी में बारुद के ढेर में अन्य रसायन मिलाए जाते समय हुआ धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरी इमारत जमींदोज हो गई और भीषण आग लग गई।
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धौलाना अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
- फोटो : अमर उजाला
मृतकों और घायलों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। मेरठ मंडल के आयुक्त एसपी सिंह ने हापुड़ की डीएम मेधा रूपम को हादसे की जांच करने के आदेश दिए हैं। धमाके के वक्त 23 से 25 मजदूर मौजूद थे। ये सभी दोपहर का खाना खाने के बाद फिर से पटाखे बनाने में लगे ही थे कि धमाका हो गया। इसकी गूंज पांच किमी. तक सुनाई दी। छह मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इनके शव फैक्टरी के प्रांगण में बिखर गए। दो घायलों ने अस्पताल ले जाए जाते समय दम तोड़ दिया। जबकि एक की अस्पताल में मृत्यु हो गई।
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धौलाना अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
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धमाका सुनकर आसपास के लोगों ने समझा कि किसी फैक्टरी का बॉयलर फटा है। इसी की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने बताया कि फैक्टरी मेरठ निवासी दिलशाद की है। उसने हापुड़ के वसीम को किराये पर दे रखा था। वसीम ही पटाखे बनवा रहा था। उसकी गाड़ी मौके पर मिली है।
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धौलाना अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
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गेट पर ताला, अंदर बन रहे थे पटाखे
फैक्टरी के गेट पर ताला लटका हुआ था ताकि लोग इसे बंद समझें। अंदर पटाखे बनाए जा रहे थे। मजदूर फैक्टरी के अंदर ही बने कमरों में रहते थे। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां रात में ट्रक आते थे।
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धौलाना अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
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आग बुझाने के नहीं थे इंतजाम
फैक्टरी में न आग बुझाने का कोई इंतजाम था और न ही प्राथमिक चिकित्सा का। मजदूरों को आग बुझाने का कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था। बारूद से पटाखे बनाने के काम के लिए कोई रसायन विशेषज्ञ भी मौजूद नहीं था। पुलिस का कहना है कि यही वजह रही कि रसायनों का मिश्रण गलत हो गया जिससे धमाका हुआ।