आवेश या बहकावा, वजह चाहे जो भी हो लेकिन सड़कों पर उतरकर उत्पात मचाते वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि कानूनी दांवपेंच में ऐसा फंसेंगे की हेकड़ी गायब हो जाएगी। अब पुलिस की सख्ती बढ़ी तो बचने के लिए आरोपितों के परिजन हर दर पर फरियाद को तैयार हैं।
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मदीना मस्जिद चौक के पास तैनात पुलिस।
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घरवाले कभी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं तो कभी पीस कमेटी की बैठक में आने वाले उन इमाम, मौलवी से पैरवी करा रहे हैं, जो पुलिस के करीब हों। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई के मूड में है और जिनकी गलती थोड़ी कम है उन्हें शर्त के साथ रियायत दी जा सकती है। शर्त ऐसी कि फिर उत्पात मचाया तो कड़ी कार्रवाई होगी।
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मदीना मस्जिद के पास तहसीलदार डा.संजीव कुमार दीक्षित।
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पुलिस अफसरों के पास रोजाना पहुंचने वाले ऐसे लोगों की संख्या दस से ज्यादा है। बसपा, सपा के नेता उनके घर, हालात की दुहाई देकर मदद मांग रहे हैं तो कई मुस्लिम धर्म गुरू की मदद की आस के साथ अफसरों के पास पहुंच रहे हैं। इसमें से ज्यादातर वे लोग हैं जिनके खिलाफ शांतिभंग के तहत कार्रवाई की गई है और 14 दिन की रिमांड पर हैं।
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आरोपी।
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अब पुलिस भी अमन चाहती है इस वजह से प्रशासन से तालमेल बैठाकर कुछ लोगों को रियायत देने की तैयारी कर ली गई है। ये वो लोग हैं जिनकी जिम्मेदारी उनके अभिभावकों ने इस शर्त पर ली है कि दोबारा गलती करने पर वह भी पैरवी में नहीं आएंगे।
फिलहाल इन्हें जुमे की नमाज के बाद ही रियायत देने का फैसला किया गया है लेकिन पुलिस अफसरों के पास इस तरह के आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। जानकारी के मुताबिक पुलिस उन गलतियों को सुधार रही है, जो पिछले शुक्रवार को हुईं थीं। मसलन, गलियों में पुलिस की मौजूदगी न होना, बुजुर्ग, संभ्रात लोगों की बातों पर यकीन कर लेना आदि। इस बार पुलिस हर गली, मोहल्ले में मुस्तैद रहेगी।