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चित्रकूट जेल गैंगवार: 13 मई की रात बिना इंट्री जेल में गया था बंदीरक्षक जगमोहन, सीसीटीवी से मिले अहम सुराग

Thu, 20 May 2021 03:04 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 20 May 2021 03:04 PM IST
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Chitrakoot jail shootout case update, Important clue found from CCTV
चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट जिला जेल में हुए खूनी संघर्ष की जांच कर रही कमेटी को जेल के सीसीटीवी से अहम सुराग मिले हैं। 13 मई की रात लगभग 9:21 बजे जेल का बंदीरक्षक जगमोहन जेल में आया था, जबकि छह मई को जगमोहन की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसको आइसोलेट की हिदायत दी गई थी। इसके बावजूद जगमोहन 13 मई की रात जेल में आया था। वह जेल रजिस्टर में इंट्री किए बगैर जेल के अंदर गया और करीब 20 मिनट बाद जेल से बाहर आ गया था। आशंका जताई जा रही है कि रात में भी वह शार्प शूटर अंशू से मिला था। पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसका मौके पर आकर अंशू को बार-बार आत्मसमर्पण के लिए भरोसा दिलाने की बात से कई सवाल उठ रहे हैं। बुधवार को जांच के दौरान बंदीरक्षक जगमोहन के आने-जाने की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो चुकी थी और अब यह जांच का हिस्सा बन चुका है।
Chitrakoot jail shootout case update, Important clue found from CCTV
चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
जांच टीम ने जब इस मामले में जगमोहन से पूछताछ की तो उसने बताया कि जेल अस्पताल में दवा लेने आया था। जांच टीम ने इस दावे की सच्चाई जानने के लिए जेल के डॉक्टर और ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग अर्दली से पूछताछ की तो उन्होंने जगमोहन के इस दावे को साफ तौर पर मना कर दिया।
 
Chitrakoot jail shootout case update, Important clue found from CCTV
चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि 14 मई को बदमाश मुकीम और मेराज की हत्या के बाद जब पुलिस टीम चित्रकूट जेल में दाखिल हुई थी तो शायद उसी दौरान जगमोहन भी जेल में दाखिल हुआ था और जगमोहन को हत्यारे अंशू दीक्षित को सरेंडर करने के लिए समझाते हुए भी देखा गया है।
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घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल - फोटो : amar ujala
इतना ही नहीं जब बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या हुई थी तब भी जगमोहन वहां बंदीरक्षक था। उसकी चित्रकूट जेल में तैनाती और कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद 13 व 14 मई को घटनास्थल पर मौजूद होने पर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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मुकीम, अंशू और मेराज की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मेराज ने मुकीम को दी थी ईद की बधाई
चित्रकूट के जिला जेल में बंद पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश मुकीम काला, मेराज और अंशू की हाई सिक्योरिटी बैरक और अस्थायी बैरक एक-दूसरे के पास थी। इसके चलते अक्सर सुबह-शाम तीनों की आपस में नजरें मिलती थीं और एक-दूसरे से बातचीत भी करते थे। 13 मई की शाम को अंधेरा होने के बाद जब अचानक जेल के अधिकारी इनकी बैरक के आसपास पहुंचे और सीसीटीवी कैमरे की जांच कर रहे थे, तभी मेराज और अंशू बैरक के बाहर आए थे। मेराज ने दूसरी बैरक के पास जाकर मुकीम काला को ईद की बधाई दी थी।

14 मई को भी सुबह सभी बंदियों को ईद की बधाई देकर मेराज ने शाम को पनीर पूड़ी की दावत अपनी तरफ से करने को कहा था। जानकारी के अनुसार बैरक से बाहर निकलकर बंदी खुद अपना भोजन लेकर आते हैं। खूनी खेल की जांच के दौरान पता चला कि हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद मेराज अस्थायी बैरक में खाना पूछने के बहाने मुकीम काला के पास जाता था। वह बहाने से उससे मुलाकात करता था। अंशू दीक्षित को शायद यह पसंद नहीं था और वह मेराज से भी खुन्नस मानने लगा था।
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