बुलंदशहर जिले के खुर्जा स्थित कैलाश अस्पताल में भर्ती आठ वर्षीय प्रिंस को जब होश में आया तो अपने पिता विनोद (35) और दादी रामबेटी (65) को ढूंढता रहा। चारों ओर बिस्तर पर घायल ही पड़े थे और चिकित्सक उनके उपचार में लगे थे। बच्चे ने रोते हुए पापा को आवाज लगाई तो स्वास्थ्यकर्मियों ने उसको चुप कराते हुए आराम करने को कहा। मासूम को यह पता ही नहीं था कि उसके पिता और दादी अब इस दुनिया में नहीं रहे।
सुबह करीब छह बजे के बाद कासगंज से उसकी मां मंजू अस्पताल पहुंचीं और बेटे प्रिंस के बारे में पूछा। उसको देखते ही सीने से चिपका लिया। कुछ देर बाद मंजू को जानकारी मिली कि उनके पति विनोद और सास रामबेटी की मौत हो गई है। यह सुनकर मंजू बदहवास हो गई।
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क्षतिग्रस्त कंटेनर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किसी तरह स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें संभाला। सीओ पूर्णिमा सिंह ने मंजू को गले लगाकर ढांढस बांधाया। सीओ ने मंजू को समझाया कि बच्चों के लिए उन्हें जीना है। दो मासूम बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधे पर है। मां को रोते हुए देखकर घायल प्रिंस उनकी गोद में बैठ गया और पापा व दादी के बारे में पूछने लगा।
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पुलिस के सामने हाथ फैलाकर गुहार लगाते हुए।
- फोटो : हिमांशु चौहान
इस पर मंजू ने प्रिंस को गले लगा लिया लेकिन कुछ कह नहीं सकीं। इसके बाद शव को ले जाने के लिए मंजू को पोस्टमार्टम हाउस पर भेजा गया। मजबूरी में लड़खड़ाते हुए और रोती बिलखती मंजू अपने बेटे प्रिंस को लेकर बुलंदशहर के लिए रवाना हो गई।
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हादसे के बाद अस्पताल में रोती-बिलखती मृतक बच्चे शिवांश की नानी रामवती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो घंटे पहले सभी ने एक साथ खाया था खाना
हादसे से लगभग दो घंटे पहले अलीगढ़ जनपद के गभाना में श्रद्धालुओं ने एक साथ खाना खाया था। घायल विजय ने बताया कि ट्रॉली सवार सभी लोग मजदूर वर्ग से थे। जात लगाने के सफर के लिए सभी लोग अपने-अपने घरों से खाना बनाकर लाए थे।
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सड़क हादसे के बाद कैलाश अस्पताल में घायलों से भरा हुआ वार्ड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अलीगढ़ के टोल प्लाजा से कुछ दूर पहले ही ट्रैक्टर-ट्रॉली को एक ढाबे के पास रोक लिया। सभी ने अपने-अपने घर का बना हुआ खाना एक साथ मिलकर खाया। मौसम भी काफी अच्छा था तो सभी सफर का आनंद ले रहे थे।